Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Apr, 2026 11:51 AM

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, जिससे इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 12.2% बढ़कर रिकॉर्ड 73.73 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। Association...
बिजनेस डेस्कः भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, जिससे इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 12.2% बढ़कर रिकॉर्ड 73.73 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। Association of Mutual Funds in India के ताजा आंकड़े इस मजबूत ग्रोथ की पुष्टि करते हैं।
इक्विटी फंड्स में जबरदस्त इनफ्लो
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। मार्च में इनफ्लो बढ़कर 40,450 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया, जो जुलाई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फरवरी में यह आंकड़ा करीब 25,978 करोड़ रुपये था।
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SIP का बढ़ता क्रेज
रिटेल निवेशकों का भरोसा SIP में भी साफ दिखा। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह संकेत देता है कि निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद लॉन्ग टर्म निवेश पर फोकस बनाए हुए हैं।
डेट और गोल्ड फंड्स से निकासी
हालांकि, कुल मिलाकर मार्च में इंडस्ट्री से 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसका मुख्य कारण डेट म्यूचुअल फंड्स से 2.94 लाख करोड़ रुपए की भारी निकासी रहा। वहीं गोल्ड ETF में भी निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जो फरवरी में 5,254 करोड़ रुपए था।
किन फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश?
इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहे, जहां 10,054 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आया। इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी निवेश बढ़ा, जबकि लार्ज-कैप फंड्स में अपेक्षाकृत कम इनफ्लो देखा गया।
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क्या है म्यूचुअल फंड?
म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश माध्यम है, जिसमें कई निवेशकों का पैसा इकट्ठा करके एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर द्वारा शेयर, बॉन्ड और अन्य एसेट्स में लगाया जाता है। SIP के जरिए छोटी रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है, जिससे जोखिम कम होता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है।