Edited By Pardeep,Updated: 01 Oct, 2026 06:19 AM

1 अक्टूबर से दिल्ली-एनसीआर में बिना वैध 'प्रदूषण नियंत्रण में' (PUC) प्रमाण पत्र के वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश 101 के तहत यह पाबंदी पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू की जा रही है।
नई दिल्ली: 1 अक्टूबर से दिल्ली-एनसीआर में बिना वैध 'प्रदूषण नियंत्रण में' (PUC) प्रमाण पत्र के वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश 101 के तहत यह पाबंदी पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू की जा रही है। दिल्ली के सभी 500 पेट्रोल पंपों पर इस अभियान को 'मिशन मोड' में चलाया जाएगा, जहां ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से वाहनों की जांच की जाएगी और नियम न मानने वाले पंपों के खिलाफ भी कार्रवाई की योजना है।
क्या PUC पास वाहन वास्तव में कम प्रदूषण फैलाते हैं?
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के भारत प्रबंध निदेशक अमित भट्ट के अनुसार, केवल वैध PUC सर्टिफिकेट होने का मतलब यह नहीं है कि वाहन कम प्रदूषण फैला रहा है। वर्तमान में पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहनों के टेस्ट में केवल कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन (HC) मापे जाते हैं, जबकि डीजल वाहनों की सिर्फ धुएं की सघनता (Smoke Opacity) जांची जाती है। इस टेस्ट में पार्टिकुलेट मैटर (PM), पार्टिकल नंबर (PN) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसे मुख्य प्रदूषकों की सीधी जांच नहीं होती है। इस वजह से कोई भी वाहन PUC टेस्ट पास करने के बावजूद उच्च NOx या कण उत्सर्जन के कारण हवा को प्रदूषित कर सकता है।
1 लाख से अधिक वाहनों का अध्ययन: सीएनजी और BS-VI गाड़ियां भी फैला रही हैं प्रदूषण
ICCT द्वारा दिल्ली और गुरुग्राम के 20 स्थानों पर 1,00,000 से अधिक वाहनों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि BS-VI टैक्सी और हल्के वाणिज्यिक वाहन, निजी कारों की तुलना में क्रमशः 2.4 और 5 गुना अधिक NOx उत्सर्जित करते हैं। इसके अलावा, सीएनजी श्रेणी के कुछ वाहनों में भी सड़क पर वास्तविक उत्सर्जन काफी अधिक पाया गया, जो सीएनजी के पूरी तरह स्वच्छ होने की धारणा को चुनौती देता है।
BS-VI डीजल वाहनों और जांच केंद्रों की खामियां
आधुनिक BS-VI डीजल वाहनों में कालिख (Soot) को रोकने के लिए डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) लगे होते हैं, लेकिन पुराना स्मोक ओपेसिटी टेस्ट DPF की खराबी या छेड़छाड़ को पकड़ने में असमर्थ है। यूरोपीय आयोग ने भी ऐसे वाहनों के लिए पार्टिकल नंबर (PN) टेस्ट की सिफारिश की है। इसके अलावा, दिल्ली के 22 यादृच्छिक (randomly selected) PUC केंद्रों पर किए गए अध्ययन में जांच की मानक प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां, एक ही वाहन की रीडिंग में भारी अंतर और असफल टेस्टों की कम रिपोर्टिंग जैसी गड़बड़ियां पाई गईं।
सुधार के लिए क्या हैं बेहतर विकल्प?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल PUC चेकिंग से प्रदूषण में सीमित सुधार ही संभव है। इसके लिए सड़क किनारे 'रिमोट सेंसिंग' उपकरण लगाए जाने चाहिए, जो चलते वाहनों के धुएं को तुरंत स्कैन कर मुख्य प्रदूषक गाड़ियों की पहचान कर सकें। इसके अलावा, ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक्स (OBD) और पार्टिकल नंबर टेस्टिंग को जोड़ने, नए आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों के पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने तथा दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के विस्तार पर जोर दिया जाना चाहिए।