Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Apr, 2026 12:06 PM

भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
बिजनेस डेस्कः भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 8% उछलकर 102.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी 8% से ज्यादा बढ़कर 104.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। इससे पहले शुक्रवार को दोनों बेंचमार्क में गिरावट देखी गई थी।
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होर्मुज में नाकेबंदी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोजाना लाखों बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी नौसेना इस रणनीतिक जलमार्ग पर कार्रवाई कर सकती है। वहीं ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य गतिविधि को सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और उसका जवाब दिया जाएगा।
बढ़ेंगी तेल की कीमतें
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो खाड़ी क्षेत्र के अन्य तेल उत्पादक देशों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
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इस बीच, सऊदी अरब ने स्थिति को संभालने के लिए अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की पूरी क्षमता बहाल करने का ऐलान किया है, ताकि सप्लाई बाधित होने की स्थिति में बाजार को राहत मिल सके।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान तनाव ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी पड़ सकता है।