Oil Prices Drop: ईरान युद्ध थमने की उम्मीद, 38 साल का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद नरम पड़ा तेल, $100 के नीचे आया भाव

Edited By Updated: 01 Apr, 2026 06:26 PM

crude oil prices retreat after major surge by over 4

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में पिछले महीने रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद से बाजार को राहत मिली है। मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 1988 में फ्यूचर...

बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में पिछले महीने रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद से बाजार को राहत मिली है। पिछले महीने 38 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज करने के बाद अब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। कीमतें गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 1988 में फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू होने के बाद किसी एक महीने की सबसे बड़ी बढ़त है।

तेल में आई 4% से ज्यादा गिरावट

हालांकि अब इसमें गिरावट शुरू हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान युद्ध अगले दो-तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है। इस बयान के बाद तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा गिरावट आई और यह फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।

जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड 4.35% गिरकर 99.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी करीब 4% फिसलकर 97.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

ईरान के राष्ट्रपति ने भी संघर्ष खत्म करने की इच्छा जताई है, हालांकि उन्होंने इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं। गौरतलब है कि यह युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था, जिसके बाद तेल की कीमतें 120 डॉलर के करीब पहुंच गई थीं और लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बनी रहीं।

सप्लाई पर अभी भी बना रहेगा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी तेल बाजार में तुरंत राहत नहीं मिलेगी। तेल सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है क्योंकि ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की भरपाई में समय लगेगा। सबसे अहम भूमिका होर्मुज की खाड़ी की रहेगी, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल और एक-तिहाई गैस की सप्लाई होती है। सप्लाई के सामान्य होने की रफ्तार ही आगे कीमतों की दिशा तय करेगी।

उत्पादन में भी आई गिरावट

फरवरी के मुकाबले मार्च में ओपेक देशों का उत्पादन रोजाना करीब 7.3 मिलियन बैरल घट गया। वहीं अमेरिका में भी उत्पादन पर असर पड़ा है। जनवरी में अमेरिका का कच्चे तेल का उत्पादन 4.1 लाख बैरल घटकर 13.25 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आ गया, जो पिछले दो साल का निचला स्तर है। तूफान के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था। 

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