Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Apr, 2026 12:10 PM

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का असर अब सीधे कर्ज बाजार पर दिखने लगा है। TransUnion CIBIL की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गोल्ड लोन में जबरदस्त उछाल आया है लेकिन इसकी असली वजह नए ग्राहक नहीं, बल्कि बढ़ती लोन राशि है यानी लोग अब उसी सोने पर पहले...
बिजनेस डेस्कः सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का असर अब सीधे कर्ज बाजार पर दिखने लगा है। TransUnion CIBIL की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गोल्ड लोन में जबरदस्त उछाल आया है लेकिन इसकी असली वजह नए ग्राहक नहीं, बल्कि बढ़ती लोन राशि है यानी लोग अब उसी सोने पर पहले से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तिमाही में गोल्ड लोन की कुल वैल्यू में सालाना आधार पर 108% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, जबकि लोन लेने वालों की संख्या में सिर्फ 45% की वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि लोग पहले के मुकाबले अधिक रकम का कर्ज ले रहे हैं।
सोने की कीमतों ने बढ़ाई ताकत
गोल्ड लोन की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण सोने की कीमतों में उछाल है। मार्च 2023 के बाद से सोने के दाम दोगुने से ज्यादा हो चुके हैं, जिससे लोगों की उधार लेने की क्षमता बढ़ी है। अब वही सोना गिरवी रखकर पहले से ज्यादा पैसा मिल रहा है।
औसत लोन साइज में बड़ा उछाल
इसी वजह से गोल्ड लोन का औसत टिकट साइज करीब 1.8 गुना बढ़ गया है। कम ग्राहकों के बावजूद बैंक और फाइनेंस कंपनियां ज्यादा रकम का लोन दे पा रही हैं। यही कारण है कि गोल्ड लोन अब रिटेल क्रेडिट में वॉल्यूम के आधार पर 36% और वैल्यू के आधार पर 39% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा सेगमेंट बन चुका है।
दक्षिण से निकलकर देशभर में फैला ट्रेंड
पहले गोल्ड लोन का बाजार दक्षिण भारत तक सीमित था लेकिन अब यह उत्तर और पश्चिम भारत में भी तेजी से फैल रहा है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर 35 साल से ऊपर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी ग्राहक इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
जोखिम भी कम नहीं
हालांकि एक्सपर्ट्स इस ट्रेंड को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानते। उनका कहना है कि यह ग्रोथ असल मांग से ज्यादा सोने की कीमतों पर निर्भर है। अगर भविष्य में सोने के दाम गिरते हैं, तो इसका असर लोन लेने वालों और देने वाली कंपनियों—दोनों पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, गोल्ड लोन की तेजी यह संकेत देती है कि अब भारत के क्रेडिट बाजार में एसेट की कीमतें ही लोन ग्रोथ को आगे बढ़ा रही हैं।