स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि, 2024-25 में प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार

Edited By Updated: 26 Mar, 2026 05:41 PM

robust growth in health insurance sector premiums cross 1 2 lakh crore

देश में स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें लगभग नौ प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की राशि 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रही है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह...

नई दिल्लीः देश में स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें लगभग नौ प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की राशि 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रही है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह वृद्धि बढ़ती जागरूकता, स्वास्थ्य देखभाल वित्तपोषण तक बेहतर पहुंच और चिकित्सा खर्चों को लेकर वित्तीय सुरक्षा की बढ़ती मांग को दर्शाती है। बयान के अनुसार, दक्षता बढ़ाने और पॉलिसीधारकों को समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने 'कैशलेस' यानी नकद रहित स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटान के लिए विशिष्ट समयसीमा निर्धारित की है। 'कैशलेस' निपटान के तहत पूर्व-मंजूरी को एक घंटे के भीतर और अंतिम मंजूरी को तीन घंटे के भीतर स्वीकृत करना शामिल है। 

बयान में कहा गया है कि इन समयसीमा का उद्देश्य देरी को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को समय पर चिकित्सा देखभाल मिल सके। पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र, उच्च कवरेज, उन्नत सुविधाओं आदि जैसे कारकों के कारण स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में वृद्धि हुई है। बयान के अनुसार, इरडा के 2024 के नियमों में यह कहा किया गया है कि बीमा उत्पादों का मूल्य सभी प्रासंगिक जोखिम कारकों के आधार पर उचित होना चाहिए और वे व्यवहारिक और मूल्य-आधारित बने रहें। साथ ही भरोसेमंद आंकड़ों और ग्राहकों की प्रतिक्रिया का उपयोग करके समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाए। 

इसके अलावा, इरडा के बीमा भरोसा पोर्टल के अनुसार, 2024-25 के दौरान सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से संबंधित 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 1,27,755 (93 प्रतिशत) का निपटान उसी वर्ष किया गया। इसमें कहा गया है कि दावों की अस्वीकृति या अस्वीकार किए जाने के मामले मुख्य रूप से विशिष्ट पॉलिसी शर्तों और सीमाओं के कारण होते हैं। बयान के अनुसार दावों की अस्वीकृति या अस्वीकार किए जाने के कुछ कारणों में खर्च का बीमा राशि से अधिक होना, सह-भुगतान खंड, पॉलिसियों में उप-सीमाएं, टॉप-अप पॉलिसियों में कटौती योग्य राशि, कमरे के किराये पर सीमा, आनुपातिक शुल्क, गैर-चिकित्सा व्यय आदि शामिल हैं। 
 

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