मोबाइल कंपनियों की तरह ही सैटकॉम कंपनियों को मिले स्पेक्ट्रम: एयरटेल अधिकारी

Edited By Updated: 10 Oct, 2026 11:37 AM

satcom companies should receive spectrum just like mobile companies

दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि उपग्रह संचार (सैटकॉम) कंपनियां मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग करना चाहती हैं, तो उन पर दूरसंचार कंपनियों के समान नियम लागू होने चाहिए।

नई दिल्लीः दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि उपग्रह संचार (सैटकॉम) कंपनियां मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग करना चाहती हैं, तो उन पर दूरसंचार कंपनियों के समान नियम लागू होने चाहिए। भारती एयरटेल के कॉरपोरेट मामलों के निदेशक एवं समूह के मुख्य नियामकीय अधिकारी राहुल वत्स ने 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) में कहा कि डायरेक्ट-टू-डिवाइस प्रौद्योगिकी में उपग्रह सीधे मोबाइल फोन पर सिग्नल भेजते हैं। यह प्रशासनिक आवंटन के तहत सैटकॉम कंपनियों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से अलग है। 

उन्होंने कहा, "यदि उपग्रह कंपनियां उसी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करना चाहती हैं, जिसका उपयोग मोबाइल कंपनियां कर रही हैं तो स्पेक्ट्रम के मूल्य निर्धारण, लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा सहित सभी नियम समान होने चाहिए।" भारत में दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी के जरिये हासिल करना होता है, जबकि सैटकॉम कंपनियों को प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाता है। इस बीच, एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने अंतरिक्ष से मोबाइल सेवाएं देने के लिए 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम हासिल किया है। 

स्टारलिंक का कहना है कि इस बैंड के सिग्नल दीवार जैसी बाधाओं को पार कर सकते हैं और इमारतों के भीतर भी मोबाइल उपकरणों तक पहुंच सकते हैं। वत्स ने कहा कि डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाओं में मोबाइल फोन पर इस्तेमाल होने वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग होता है और इस तरह के स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के जरिये होना चाहिए। 

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