Share Crash: राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI का बड़ा एक्शन, रेवेन्यू को 99% तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप

Edited By Updated: 04 Jun, 2026 11:38 AM

sebi takes major action against rajesh exports shares hit lower circuit

सोने की रिफाइनिंग और जूलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में गुरुवार को बाजार खुलते ही 5 प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया। यह गिरावट भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम...

बिजनेस डेस्कः सोने की रिफाइनिंग और जूलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में गुरुवार को बाजार खुलते ही 5 प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया। यह गिरावट भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद आई। कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, जांच के दौरान सहयोग न करने और कंपनी के रेवेन्यू को 97 से 99% तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है। 

बीएसई पर कंपनी का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 110.15 रुपए पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को यह 5 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपए पर खुला। पिछले 52 सप्ताह में शेयर का उच्चतम स्तर 239 रुपए और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपए रहा है।

सेबी ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जांच और फोरेंसिक ऑडिट के दौरान कंपनी में वित्तीय अनियमितताओं के कई संकेत मिले हैं। नियामक के अनुसार, कंपनी ने अपने राजस्व (रेवेन्यू) को 97 से 99 प्रतिशत तक बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया। सेबी ने इस मामले को अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व बताया है।

क्या है मामला?

मार्च 2024 में सेबी को कंपनी के खातों में दिखाए गए बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स को लेकर शिकायत मिली थी। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की विस्तृत जांच शुरू की और BDO India Services को फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया।

जांच के दौरान सेबी ने कंपनी से वित्तीय विवरणों और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन की जानकारी मांगी। नियामक ने आरोप लगाया कि कंपनी ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया और जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने में कमी बरती।

राजेश एक्सपोर्ट्स, जो एनएसई और बीएसई दोनों पर सूचीबद्ध है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के उत्पादों का कारोबार करती है। कंपनी ‘शुभ जूलर्स’ ब्रांड के तहत जूलरी आउटलेट भी संचालित करती है। सेबी ने कंपनी की सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित सहायक इकाइयों की वित्तीय रिपोर्टिंग की भी जांच की है।

अंतरिम आदेश के तहत राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी की प्रतिभूतियों में किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही कंपनी को 30 दिनों के भीतर मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
 

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