Edited By Pardeep,Updated: 03 Sep, 2026 10:10 PM

भारतीय उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के समूह की एक इकाई को अपने नए अधिग्रहण (acquisition) के लिए बैंकों से उम्मीद से कहीं अधिक लोन के प्रस्ताव मिले हैं।
बिजनेस डेस्कः भारतीय उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के समूह की एक इकाई को अपने नए अधिग्रहण (acquisition) के लिए बैंकों से उम्मीद से कहीं अधिक लोन के प्रस्ताव मिले हैं। कंपनी शेल पीएलसी (Shell Plc) के भारत में मौजूद रिन्यूएबल एनर्जी एसेट्स (अक्षय ऊर्जा संपत्तियों) को खरीदने के लिए 14,000 करोड़ रुपये का लोन जुटाने की योजना बना रही थी, लेकिन उसे बैंकों से करीब 70 प्रतिशत अधिक यानी लगभग 24,000 करोड़ रुपये ($2.5 बिलियन) की ऋण प्रतिबद्धता (कमिटमेंट्स) मिल चुकी है।
इन दिग्गज बैंकों ने बढ़ाया हाथ
इस बड़े कॉर्पोरेट लोन के लिए देश के कम से कम चार बड़े बैंकों ने अपनी ओर से वित्तीय प्रतिबद्धता जताई है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार:
- एसबीआई (SBI) और एक्सिस बैंक (Axis Bank): इन दोनों बैंकों ने प्रत्येक ने ₹7,000 करोड़ तक की ऋण सीमा देने की प्रतिबद्धता जताई है।
- पीएनबी (PNB) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: इन दोनों सरकारी बैंकों ने भी करीब ₹5,000-₹5,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन की पेशकश की है।
हालांकि, सौदे के तहत वास्तविक ऋण वितरण (disbursement) इन घोषित सीमाओं से थोड़ा कम हो सकता है। इसके अलावा, बिड़ला समूह एचडीएफसी बैंक लिमिटेड और कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड जैसे कुछ अन्य निजी बैंकों के साथ भी बातचीत कर रहा है, जो इस ऋण योजना में अतिरिक्त क्रेडिट लाइन जोड़ सकते हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बड़ा धमाका
इस लोन के जरिए आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स लिमिटेड (Aditya Birla Renewables Ltd.) भारत में 5-गीगावाट के विशाल रिन्यूएबल पोर्टफोलियो पर नियंत्रण हासिल करने के लिए 'सोलेनेर्जी पावर प्राइवेट लिमिटेड' (Solenergi Power Pvt.) का 100% अधिग्रहण करेगी। सोलेनेर्जी के पास 'स्प्रिंग एनर्जी' (Sprng Energy) का मालिकाना हक है, जो देश में शेल (Shell) की अक्षय ऊर्जा संपत्तियों का संचालन करती है।
इस क्लब लोन पर ब्याज दरें 7.6% से 7.7% के बीच तय की गई हैं और इसकी भुगतान अवधि (टेनोर) 12 से 20 वर्ष तक की है। यह लोन कंपनी समर्थित कई विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) द्वारा लिया जा रहा है।
नियमों में ढील से बढ़ा बैंकों का उत्साह
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से 1 जुलाई से स्थानीय बैंकों को कॉर्पोरेट अधिग्रहणों के वित्तपोषण (financing) की अनुमति दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही भारतीय बैंकों में बड़े कॉर्पोरेट सौदों को फाइनेंस करने के लिए भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से 15 अगस्त के बीच भारतीय बैंकों द्वारा दिए गए लोन में 18.3% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो जमा राशि में हुई 14.7% की बढ़ोतरी से अधिक है।