Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Jan, 2026 03:15 PM

वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाला उद्योग चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.56 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। उद्योग संगठन एसीएमए ने यह जानकारी दी। उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-सितंबर अवधि में...
बिजनेस डेस्कः वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाला उद्योग चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.56 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। उद्योग संगठन एसीएमए ने यह जानकारी दी। उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-सितंबर अवधि में 3.33 लाख करोड़ रुपए का कारोबार किया था। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) ने बयान में कहा कि घरेलू मांग, मजबूत प्रतिस्थापन एवं रखरखाव बाजार (आफ्टरमार्केट) तथा क्षमता विस्तार, स्थानीयकरण एवं प्रौद्योगिकी उन्नयन में जारी निवेश से वृद्धि को समर्थन मिला।
उद्योग संगठन ने कहा कि वाहनों की बढ़ती संख्या, मरम्मत एवं रखरखाव प्रणाली के संगठित रूप लेने तथा संगठित इकाइयों की पैठ बढ़ने से बिक्री बाद की सेवाओं में नौ प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह 53,160 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस अवधि में मुख्य रूप से यात्री वाहन एवं एलसीवी खंड के नेतृत्व में मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) की बिक्री 7.3 प्रतिशत बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपए हो गई।
बाह्य व्यापार के मोर्चे पर, मोटर वाहन कल-पुर्जों का निर्यात 9.3 प्रतिशत बढ़कर 12.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि आयात करीब 12.5 प्रतिशत बढ़कर 12.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसके परिणामस्वरूप 18 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हुआ। वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में अधिशेष 15 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। एसीएमए के महानिदेशक विन्नी मेहता ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही का प्रदर्शन भारत के मोटर वाहन परिवेश की मजबूती को दर्शाता है, जिसमें ओईएम आपूर्ति और बिक्री बाद की सेवाओं दोनों में वृद्धि हुई है।''