Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 May, 2026 01:31 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और पूर्व IMF डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता...
बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और पूर्व IMF डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि तेल, LPG और LNG की सप्लाई प्रभावित होने से आम लोगों और कारोबार दोनों पर दबाव बढ़ रहा है। कई रेटिंग एजेंसियों ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाया है।
GDP ग्रोथ पर पड़ सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत की GDP ग्रोथ पर लगभग 0.5% का असर पड़ सकता है। वहीं तेल 100 डॉलर तक पहुंचने पर यह असर 1% तक हो सकता है। गोपीनाथ ने कहा कि मौजूदा संकट 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़ा साबित हो सकता है। उन्होंने घरेलू खपत में संयम बरतने और आयात कम करने की जरूरत पर जोर दिया।
रुपए की कमजोरी को बताया फायदेमंद
रुपए में कमजोरी को लेकर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। कमजोर रुपया आयात कम करने में मदद करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटता है। उन्होंने सरकार और रिजर्व बैंक को सलाह दी कि बाजार में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
महंगाई बढ़ सकती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
गीता गोपीनाथ ने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों से महंगाई और ईंधन की कीमतें बढ़ना स्वाभाविक है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। मजबूत घरेलू मांग और बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक आधार भारत को बाहरी झटकों से निपटने में मदद करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि सही नीतियों और आर्थिक सुधारों के जरिए भारत इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपट सकता है।