Edited By Parveen Kumar,Updated: 08 Jan, 2026 09:01 PM

अयोध्या के प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन में आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव आज 8 जनवरी को अपने समापन दिवस पर पहुंच गया। सात दिनों से चल रहे इस आध्यात्मिक और राष्ट्रचेतना से जुड़े आयोजन का आज अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है। संयोगवश, आज का दिन इस महोत्सव के आयोजक...
नेशनल डेस्क: अयोध्या के प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन में आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव आज 8 जनवरी को अपने समापन दिवस पर पहुंच गया। सात दिनों से चल रहे इस आध्यात्मिक और राष्ट्रचेतना से जुड़े आयोजन का आज अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है। संयोगवश, आज का दिन इस महोत्सव के आयोजक बृज भूषण शरण सिंह के जन्मदिवस से भी जुड़ा हुआ है, जिसने इस दिवस को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया।
जानकारी के अनुसार, बृज भूषण शरण सिंह ने इस वर्ष अपने जन्मदिवस को निजी उत्सव तक सीमित न रखते हुए, समाज और राष्ट्र के लिए एक वैचारिक संदेश के रूप में राष्ट्र कथा के आयोजन को समर्पित किया। इसी भाव के साथ 1 जनवरी से इस आयोजन की शुरुआत की गई थी, जो आज सातवें दिन अपने विधिवत समापन की ओर अग्रसर है।
राष्ट्र कथा के आरंभिक दिन से ही आयोजन का स्वरूप सामान्य धार्मिक कार्यक्रम से कहीं आगे दिखाई दिया। उद्घाटन अवसर पर बृज भूषण शरण सिंह जी की गंभीर और भावुक उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आयोजन उनके लिए आस्था, दायित्व और संकल्प का संगम है। इसके पश्चात पूरे सप्ताह कथा अनुशासन, गरिमा और वैचारिक गहराई के साथ आगे बढ़ती रही।
पूरे आयोजन में परम पूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज द्वारा राम कथा का प्रवचन किया गया। उनके कथनों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक मूल्य, कर्तव्यबोध और नैतिक नेतृत्व जैसे विषयों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया। अंतिम दिन की कथा में इन सभी विचारों का सार एक समग्र संदेश के रूप में सामने आ रहा है।
राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान विभिन्न दिनों में कई विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व कथा सत्रों में सम्मिलित हुए। आयोजकों का मानना है कि इन अतिथियों की सहभागिता ने आयोजन को सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान की।
आयोजन के प्रत्येक दिन में बृज भूषण शरण सिंह के पुत्र प्रतीक भूषण सिंह एवं करण भूषण सिंह की सक्रिय भूमिका भी देखने को मिली। इसे आयोजन से जुड़े उत्तरदायित्वों की पीढ़ीगत निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि जन्मदिवस के अवसर पर किसी प्रकार का औपचारिक समारोह या व्यक्तिगत उत्सव आयोजित नहीं किया गया। पूरा दिन राम कथा, साधना और आत्ममंथन को समर्पित रहा। आयोजकों के अनुसार, यह जन्मदिवस सेवा, विचार और राष्ट्रभाव के साथ मनाया गया।
समापन दिवस पर आयोजन समिति ने सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज, सभी अतिथियों, स्वयंसेवकों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया। उनके सहयोग से यह सात दिवसीय राष्ट्र कथा अपने उद्देश्य और संदेश के साथ पूर्णता की ओर पहुंची।
फिलहाल कथा का अंतिम प्रवाह जारी है और सायंकाल विधिवत समापन की प्रक्रिया संपन्न होगी। अयोध्या में आयोजित यह राष्ट्र कथा महोत्सव आने वाले समय में एक ऐसे आयोजन के रूप में स्मरण किया जाएगा, जिसने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रचेतना को एक मंच पर साकार किया।