क्या मिलने वाला है कोई शुभ संकेत ? अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले बदल गया हिमलिंग का आकार, नई तस्वीर देख भावुक हुए श्रद्धालु

Edited By Updated: 29 Jun, 2026 11:19 AM

amarnath yatra 2026 news

अमरनाथ की यात्रा शुरू होने में अब बहुत की कम दिन रह गए हैं। जो लोग इस साल बाबा बर्फानी की यात्रा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, उनके लिए बहुत भावुक करने वाली खबर सामने आई है।

Amarnath Yatra 2026 News : अमरनाथ की यात्रा शुरू होने में अब बहुत की कम दिन रह गए हैं। जो लोग इस साल बाबा बर्फानी की यात्रा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, उनके लिए बहुत भावुक करने वाली खबर सामने आई है। इस साल बाबा बर्फानी की यात्रा शुरू होने से पहले ही अमरनाथ गफा से पवित्र हिमलिंग की नई तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें अमरनाथ गुफा में मौजूद हिमलिंग का आकार में एक दिव्य बदलाव  देखने को मिल रहा है। हिमलिंग के इस अलौकिक रूप को देखकर देवों के देव महादेव के भक्तों में एक अलग का उत्साह देखने को ही नहीं मिला, बल्कि भावुक भी हो उठे हैं। हिमलिंग के आकार में बदलाव किसी बड़े और शुब संकेत की तरफ भी इशारा कर रहा है।  तो आइए जानते हैं कि इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर क्या कुछ नए बदलाव देखने को मिलेंगे। 

सोशल मीडिया और मीडिया जगत में इस समय पवित्र गुफा की जो ताजा तस्वीरें वायरल हो रही हैं, उनमें हिमलिंग का आकार बेहद सुगठित, विशाल और अलौकिक नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार हिमलिंग का स्वरूप काफी मजबूत और दिव्य दिखाई दे रहा है। अमरनाथ गुफा के आसपास इस बार मौसम के बदले मिजाज और अच्छी बर्फबारी के कारण हिमलिंग अपने पूर्ण और भव्य आकार में प्रकट हुए हैं। इस नई तस्वीर को देखकर देश के कोने-कोने में बैठे श्रद्धालु सोशल मीडिया पर हर-हर महादेव और जय बाबा बर्फानी के जयकारे लगा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा शुरू होने से ठीक पहले बाबा का ऐसा रूप दिखना इस बात का संकेत है कि इस साल की यात्रा बेहद सुखद, सुरक्षित और मंगलमयी होने वाली है।

क्या है हिमलिंग के आकार बदलने का धार्मिक महत्व?
हिंदू धर्म और शिव पुराण के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिमलिंग प्राकृतिक रूप से चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता और बढ़ता है। माना जाता है कि शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे चंद्रमा का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे हिमलिंग का आकार भी पूर्णता की ओर बढ़ता है और पूर्णिमा के दिन यह अपने पूरे स्वरूप में आ जाता है। इसके बाद कृष्ण पक्ष में इसका आकार धीरे-धीरे छोटा होने लगता है।

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