Ardh Kumbh 2027 : 2027 में इतिहास रचने वाला योग ! हरिद्वार और नासिक में एक साथ दो-दो कुंभ

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 02:45 PM

ardh kumbh 2027

Ardh Kumbh 2027 :  पिछले वर्ष संपन्न हुए पूर्ण महाकुंभ में न केवल भारत, बल्कि विश्व के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। कुंभ परंपरा की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि जैसे ही एक कुंभ समाप्ति की ओर बढ़ता...

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Ardh Kumbh 2027 :  पिछले वर्ष संपन्न हुए पूर्ण महाकुंभ में न केवल भारत, बल्कि विश्व के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। कुंभ परंपरा की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि जैसे ही एक कुंभ समाप्ति की ओर बढ़ता है, वैसे ही अगले कुंभ की तिथियों की घोषणा कर दी जाती है। इसका कारण यह है कि कुंभ का आयोजन पूरी तरह ग्रहों और नक्षत्रों की निश्चित खगोलीय स्थितियों पर आधारित होता है।

इसी परंपरा के तहत नासिक कुंभ की तारीखें पहले ही निर्धारित की जा चुकी हैं लेकिन वर्ष 2027 को विशेष इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस साल एक नहीं, बल्कि दो कुंभ आयोजनों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वर्ष 2027 में हरिद्वार और नासिक दोनों स्थानों पर कुंभ का आयोजन होगा। यानी एक ही वर्ष में श्रद्धा और आस्था के दो बड़े धार्मिक आयोजन देखने को मिलेंगे। ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि यह ग्रहयोग क्या संकेत देता है और इन आयोजनों की तैयारियां किस स्तर पर पहुंच चुकी हैं।

एक ही वर्ष में दो कुंभ का संयोग कैसे ?
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जनवरी 2027 में हरिद्वार में अर्धकुंभ का आयोजन होगा, जबकि नासिक में पूर्ण कुंभ 17 जुलाई से 17 अगस्त 2027 तक चलेगा। दोनों आयोजनों के बीच लगभग छह महीने का अंतर रहेगा। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से दोनों एक ही साल में आते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार ये अलग-अलग वर्षों में पड़ते हैं, क्योंकि वैदिक नववर्ष मार्च के आसपास प्रारंभ होता है। इसी कारण हरिद्वार का अर्धकुंभ नासिक कुंभ से पहले माना जाता है। यह पूरी व्यवस्था वैदिक ज्योतिष की सूक्ष्म और सटीक गणनाओं पर आधारित है।

क्या यह संयोग अभूतपूर्व है?
ज्योतिषाचार्य शास्त्री कौशलेन्द्र दास के अनुसार, 2027 में नासिक में पूर्ण कुंभ और हरिद्वार में अर्धकुंभ का आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि कुंभ आयोजन चार श्रेणियों में विभाजित हैं कुंभ, अर्धकुंभ, महाकुंभ और पूर्ण महाकुंभ। सामान्य कुंभ हर तीन वर्ष में, अर्धकुंभ छह वर्ष में, महाकुंभ बारह वर्ष में और बारह महाकुंभों के बाद पूर्ण महाकुंभ का आयोजन होता है।

हाल ही में प्रयागराज में जो आयोजन संपन्न हुआ, वह पूर्ण महाकुंभ था। उल्लेखनीय है कि महाकुंभ और पूर्ण महाकुंभ केवल प्रयागराज में ही आयोजित होते हैं, जबकि हरिद्वार और नासिक में कुंभ तथा अर्धकुंभ होते हैं। यह सब ग्रहों की स्थिति और खगोलीय संयोगों पर निर्भर करता है।

नासिक कुंभ की तैयारियां जोरों पर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक इन चार स्थानों पर गिरी थीं और हर स्थान पर अलग-अलग राशि योग बनता है। इसी आधार पर हर तीन वर्ष में किसी एक स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है। नासिक कुंभ को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। गिरीश महाजन को कुंभ मंत्री नियुक्त किया गया है, जिन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन का गहन अध्ययन किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों से समन्वय बनाकर नासिक कुंभ की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

हालांकि नासिक के सामने कई चुनौतियां भी हैं। गोदावरी नदी का कुंभ क्षेत्र प्रयागराज की तुलना में छोटा है, और यदि अनुमान से अधिक श्रद्धालु पहुंचे तो व्यवस्थाएं संभालना कठिन हो सकता है। इसके अलावा नासिक कुंभ जुलाई-अगस्त के मानसूनी मौसम में होता है, जिससे सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जटिलता और बढ़ जाती है।

हरिद्वार में अर्धकुंभ की तैयारी
हरिद्वार में जनवरी 2027 में होने वाले अर्धकुंभ को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य है कि भले ही यह अर्धकुंभ हो, लेकिन आयोजन की भव्यता और व्यवस्थाएं पूर्ण कुंभ के समान हों। अर्धकुंभ की परंपरा सातवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के काल में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य धार्मिक संवाद और विचारों का आदान-प्रदान था। यह आयोजन बृहस्पति के 12 वर्षीय चक्र के मध्य काल में होता है।


 

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