Art Of Living: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के सान्निध्य में 182 देशों में करोड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा का सनातन पर्व मनाया

Edited By Updated: 31 Jul, 2026 01:48 PM

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Art Of Living: एशिया, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और भारत सहित विश्व के 182 देशों में विभिन्न आस्थाओं, राष्ट्रीयताओं, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े करोड़ों श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक वैश्विक कृतज्ञता-उत्सव में एकत्रित हुए।...

Art Of Living: एशिया, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और भारत सहित विश्व के 182 देशों में विभिन्न आस्थाओं, राष्ट्रीयताओं, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े करोड़ों श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक वैश्विक कृतज्ञता-उत्सव में एकत्रित हुए। इस अवसर पर उन्होंने गुरु-तत्त्व तथा आध्यात्मिक आचार्यों की अखंड परंपरा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए, गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की, जिनके माध्यम से उन्हें जीवन में आनंद, आंतरिक रूपांतरण और शाश्वत ज्ञान का अमूल्य प्रसाद प्राप्त हुआ है।

गुरुदेव ने संयुक्त राज्य अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के बून आश्रम से वैश्विक गुरु पूर्णिमा समारोह का नेतृत्व किया। इस अवसर पर 182 देशों के करोड़ों श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से तथा सीधे प्रसारण के माध्यम से इस दिव्य उत्सव में सहभागी बने।

गहन कृतज्ञता, मौन और आनंद से ओत-प्रोत वातावरण में गुरुदेव ने पूर्णिमा ध्यान का मार्गदर्शन किया। इसके उपरांत आध्यात्मिक गुरुओं की अखंड परंपरा के सम्मान में सरल, किंतु अत्यंत भावपूर्ण गुरु पूजा संपन्न हुई, जिसने उपस्थित सभी साधकों को श्रद्धा और भक्ति के दिव्य भाव से अभिभूत कर दिया।

गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा, “गुरु केवल ज्ञान प्रदाता नहीं है, वह स्वयं ज्ञान का साक्षात प्रकाश है। गुरु आपकी सबसे बड़ी  संपत्ति है। गुरु ही माता हैं, पिता हैं, मित्र हैं और जीवन-पथ के सच्चे सहचर हैं।”

गुरु-शिष्य संबंध की विलक्षणता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा, “जब आपके जीवन में गुरु होते हैं, तब मुक्ति की चाह भी शेष नहीं रहती क्योंकि गुरु का सान्निध्य ही अपने आप में मुक्ति है।”

जीवन में गुरु की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गुरुदेव ने कहा, “गुरु मौन रहकर, पीछे से आपका मार्गदर्शन करते हैं। वे नेतृत्व का प्रदर्शन नहीं करते। गुरु आपको चयन की स्वतंत्रता भी देते हैं और चयन के बोझ से भी मुक्त कर देते हैं।”

भारत में आर्ट ऑफ लिविंग के सभी केंद्रों पर विशेष गुरु पूजा, सेवा गतिविधियों तथा भव्य सत्संगों के माध्यम से गुरु पूर्णिमा का उल्लासपूर्वक आयोजन किया गया। देशभर के साधक बून (अमेरिका) से प्रसारित वैश्विक समारोह के सीधे प्रसारण के माध्यम से विश्वव्यापी आर्ट ऑफ लिविंग परिवार से जुड़े।

बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में उत्सव का शुभारंभ
सौ से अधिक गुरु-पूजा पंडितों द्वारा संपन्न अत्यंत शांत, गरिमामय और भावविभोर कर देने वाली सामूहिक गुरु पूजा से हुआ। वहीं नई दिल्ली के भारत मंडपम में तीन हजार से अधिक साधक भक्ति-रस से ओत-प्रोत भजनों में तल्लीन हुए। कोलकाता में आर्ट ऑफ लिविंग के निर्वाण स्टेशन के साथ हुए भजन-जैमिंग ने भक्तों को भक्ति और आनंद के अद्वितीय रंग में रंग दिया। श्री श्री अकादमी का सभागार हजारों श्रद्धालुओं से पूर्णतः भर गया, जहां सभी भक्त भाव-विभोर होकर भजनों की मधुर स्वर-लहरियों पर झूम उठे।

विश्वभर में आर्ट ऑफ लिविंग के केंद्रों पर ध्यान, भक्तिमय संगीत तथा सेवा गतिविधियों के साथ गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। मलेशिया में सैकड़ों श्रद्धालु इस उत्सव में सम्मिलित हुए, जबकि अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में भव्य सत्संग का आयोजन किया गया। जर्मनी के बैड एंटोगास्ट स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में पारंपरिक गुरु पूर्णिमा समारोह आयोजित हुआ, वहीं दक्षिण अफ्रीका में स्वयंसेवकों ने विभिन्न सामुदायिक सेवा कार्यों के माध्यम से इस दिवस को सार्थक बनाया।

नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, सिंगापुर सहित अनेक देशों में भी गुरु पूर्णिमा के विविध आयोजन हुए। इन समारोहों ने यह पुनः स्थापित किया कि गुरु पूर्णिमा किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को कृतज्ञता, श्रद्धा, आत्मीयता और आध्यात्मिक एकत्व के सूत्र में पिरोने वाला एक सार्वभौमिक उत्सव है।

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