Ayodhya Ram Mandir: श्री राम मंदिर सजेगा नई गरिमा से, उप-शिखरों पर जल्द फहराया जाएगा ध्वजा

Edited By Updated: 01 Dec, 2025 10:20 AM

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Ayodhya Ram Mandir: रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वज फहराए जाने के बाद अब परिसर के अन्य उप-मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण की तिथि को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इन उप-मंदिरों के लिए तैयार किए गए ध्वजों का पूजन भी मुख्य ध्वज के साथ...

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Ayodhya Ram Mandir: रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वज फहराए जाने के बाद अब परिसर के अन्य उप-मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण की तिथि को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इन उप-मंदिरों के लिए तैयार किए गए ध्वजों का पूजन भी मुख्य ध्वज के साथ पहले ही किया जा चुका है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अब इन उप-मंदिरों पर ध्वज फहराने की नई तिथि तय करने के लिए आपस में विचार-विमर्श करेंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह निर्णय कब लिया जाएगा, लेकिन ट्रस्ट सूत्रों का कहना है कि ध्वजारोहण बहुत जल्द होने की संभावना है। ध्वज स्थापित करने से पहले शिखरों पर एक ट्रायल प्रक्रिया भी करने का प्रस्ताव है, ताकि वास्तविक ध्वजारोहण में कोई बाधा न आए। यह जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था को सौंप दी गई है।

इसी क्रम में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि बुधवार को अयोध्या पहुंचे, जिससे माना जा रहा है कि उप-मंदिरों के शिखरों पर ध्वज फहराने से संबंधित निर्णय अब निकट भविष्य में लिया जा सकता है। ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र का कहना है कि इस विषय पर अंतिम निर्णय सभी ट्रस्टियों से चर्चा के बाद ही होगा। वहीं, ट्रस्ट महासचिव चंपतराय भी इस पूरे विषय पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

मंदिर व्यवस्था के प्रमुख और विहिप नेता गोपाल राव ने भी संकेत दिया है कि शीघ्र ही इन सभी उप-मंदिरों पर ध्वज फहरा दिए जाएंगे। राम मंदिर के चारों दिशाओं और कोणों पर स्थित उप-मंदिरों में भगवान सूर्य, हनुमान, गणेश, शिव, शेषावतार, माता अन्नपूर्णा और भगवती दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनके शिखर भी मुख्य शिखर की तरह स्वर्णमंडित बनाए गए हैं। यहां स्थापित सभी प्रतिमाएं जयपुर में निर्मित हुई हैं, जबकि शिवलिंग दक्षिण भारत के काले पत्थर से तैयार किया गया है।

इन सभी उप-मंदिरों में देव प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है और भक्त इनके दर्शन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। वैदिक आचार्य संजय शास्त्री के अनुसार किसी भी मंदिर के शिखर पर शुभ अथवा अभिजित मुहूर्त में ही ध्वज फहराना शास्त्रसम्मत माना जाता है- इसी आधार पर ध्वजारोहण की तिथि निर्धारित की जाएगी।

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