Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Mar, 2026 01:16 PM

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विज्ञान और अध्यात्म का एक ऐसा मेल देखने को मिल रहा है, जो आने वाले कई वर्षों तक दुनिया को अचंभित करेगा। CBRI रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है, जिससे अब हर साल रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक साक्षात...
Ayodhya Ram Mandir News : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विज्ञान और अध्यात्म का एक ऐसा मेल देखने को मिल रहा है, जो आने वाले कई वर्षों तक दुनिया को अचंभित करेगा। CBRI रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है, जिससे अब हर साल रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक साक्षात सूर्य देव करेंगे। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने इस चमत्कारिक व्यवस्था को स्थायी रूप देने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की के साथ अगले 10 वर्षों के लिए एक आधिकारिक अनुबंध करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब है कि अगले एक दशक तक सूर्य तिलक की पूरी तकनीकी देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी CBRI की होगी।
क्या है यह 'सूर्य तिलक' तकनीक ?
यह कोई साधारण लाइट नहीं, बल्कि ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम का कमाल है। मंदिर की तीसरी मंजिल पर उच्च गुणवत्ता वाले दर्पण और लेंस लगाए गए हैं। इसमें किसी भी तरह की बैटरी या बिजली का उपयोग नहीं किया गया है। सूरज की किरणें ऊपरी मंजिल से पाइपों और लेंस के जरिए Reflect होकर सीधे गर्भगृह में प्रभु के मस्तक तक पहुंचती हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसी गणना की है कि हर साल रामनवमी के दिन दोपहर ठीक 12:00 बजे सूरज की किरणें रामलला के ललाट को सुशोभित करेंगी।
10 साल के अनुबंध की जरूरत क्यों ?
चूंकि हर साल सूर्य की स्थिति और तिथियों में थोड़ा बदलाव होता है, इसलिए इस सिस्टम को हर बार ट्यून या अपडेट करना पड़ता है। CBRI की टीम हर रामनवमी से पहले मंदिर आकर सिस्टम का परीक्षण करेगी। अनुबंध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी तकनीकी खराबी के कारण इस दिव्य परंपरा में कोई बाधा न आए।
26 मार्च को होगा इस साल का सूर्य तिलक
इस वर्ष 26 मार्च 2026 को पड़ने वाली रामनवमी पर भक्त एक बार फिर इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनेंगे। होली के बाद वैज्ञानिकों की टीम अयोध्या पहुंचकर इसका ट्रायल शुरू कर देगी। दोपहर 12 बजे लगभग 3 से 4 मिनट तक प्रभु का मस्तक सूर्य की रोशनी से जगमगाएगा।
भक्तों के लिए गर्व का क्षण
यह तकनीक दुनिया को दिखाती है कि भारतीय वैज्ञानिक अपनी प्राचीन परंपराओं को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर कैसे जीवंत रख सकते हैं। त्रेता युग में भगवान राम ने 'सूर्यवंश' में जन्म लिया था, और आज कलियुग में स्वयं सूर्य देव उनके मंदिर में उनका अभिषेक कर रहे हैं।
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