Ayodhya Ram Mandir : पुरी से निकला रामभक्ति का अनमोल उपहार, 286 किलो का स्वर्ण धनुष 22 जनवरी को अयोध्या में होगा प्रतिष्ठित

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 08:02 AM

ayodhya ram mandir

Ayodhya Ram Mandir : ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम में अयोध्या के श्रीराम मंदिर को समर्पित किए जाने वाले दिव्य स्वर्ण कोदंड का अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ स्वागत किया गया। 286 किलोग्राम वजनी यह महाधनुष केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि...

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Ayodhya Ram Mandir : ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम में अयोध्या के श्रीराम मंदिर को समर्पित किए जाने वाले दिव्य स्वर्ण कोदंड का अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ स्वागत किया गया। 286 किलोग्राम वजनी यह महाधनुष केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ओडिशा और उत्तर भारत के बीच सनातन परंपरा को जोड़ने वाला आध्यात्मिक सेतु बनकर उभरा है।

राउरकेला से आरंभ हुई इस पावन यात्रा ने ओडिशा के अनेक जिलों से होते हुए पुरी में प्रवेश किया। मार्ग में जिन-जिन स्थानों से यह कोदंड गुजरा, वहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, भक्ति गीतों और जय श्रीराम के जयघोष के साथ इसका अभिनंदन किया। पुरी के ऐतिहासिक बड़दांड पर पारंपरिक विधि-विधान से इसका स्वागत किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

महाप्रभु जगन्नाथ की पवित्र भूमि पर विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत इस स्वर्ण कोदंड को अयोध्या के लिए रवाना किया गया। इसे सनातन संस्कृति की अखंडता और आध्यात्मिक एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

22 जनवरी को अयोध्या में होगा समर्पण
पुरी स्थित उत्तरपार्श्व मठ में श्रद्धालुओं को इस दिव्य कोदंड के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। बड़ी संख्या में भक्त इस आयोजन में शामिल हुए और आध्यात्मिक उल्लास का अनुभव किया। कार्यक्रम के अंतर्गत जगन्नाथ मंदिर की परिक्रमा भी की गई।

इसके बाद कोदंड को अयोध्या की ओर प्रस्थान कराया गया। 22 जनवरी को इसे भगवान श्रीराम के चरणों में अर्पित किया जाएगा। चरण-स्पर्श के पश्चात इस दिव्य धनुष को श्रीराम मंदिर के संग्रहालय में सुरक्षित रूप से स्थापित किया जाएगा।

सनातन जागरण मंच की प्रेरणादायक पहल
इस भव्य स्वर्ण कोदंड का निर्माण राउरकेला स्थित सनातन जागरण मंच के प्रयासों से संभव हुआ है। ओडिशा के सभी 30 जिलों की यात्रा पूरी करने के बाद यह अब अयोध्या की ओर अग्रसर है। इसके निर्माण में लगभग 1 किलोग्राम सोना, 2.5 किलोग्राम चांदी तथा तांबा, जस्ता और लोहे का उपयोग किया गया है।
शिल्पकला की दृष्टि से यह कोदंड अत्यंत अद्वितीय है। पीतल और तांबे से निर्मित इस धनुष पर स्वर्ण परत चढ़ाई गई है, जिससे इसकी भव्यता और दिव्यता और भी बढ़ जाती है। इसके विशाल आकार और वजन को ध्यान में रखते हुए एक विशेष रूप से सुसज्जित रथ तैयार किया गया है।

तीन राज्यों से गुजरती ऐतिहासिक संकल्प यात्रा
इस संकल्प यात्रा की शुरुआत पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार से विधिवत पूजा के साथ हुई। लगभग 1400 किलोमीटर लंबी यह यात्रा ओडिशा से झारखंड और बिहार के कुछ क्षेत्रों से होती हुई उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक पहुंचेगी। अयोध्या पहुंचने पर कोदंड के साथ भव्य शोभायात्रा निकालने की योजना है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा जाएगा। इस संपूर्ण यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अपार उत्साह है और इसे सनातन आस्था की एक ऐतिहासिक तथा प्रेरणास्पद पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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