Chaitra Navratri 2026 : दुर्लभ संयोगों में शुरू होगी चैत्र नवरात्रि, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 03:21 PM

chaitra navratri 2026

Chaitra Navratri 2026 : वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पर्व न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भी अत्यंत असाधारण और दुर्लभ होने वाला है। इस वर्ष शक्ति की उपासना का यह महापर्व कई ऐसे शुभ संयोगों और ग्रह-नक्षत्रों की युति...

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Chaitra Navratri 2026 : वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पर्व न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भी अत्यंत असाधारण और दुर्लभ होने वाला है। इस वर्ष शक्ति की उपासना का यह महापर्व कई ऐसे शुभ संयोगों और ग्रह-नक्षत्रों की युति में आ रहा है, जो साधकों को उनकी साधना का कई गुना अधिक फल प्रदान करेंगे। आइए विस्तार से जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियों, दुर्लभ ग्रहयोगों, घटस्थापना के शुभ मुहूर्त और इसके विशेष महत्व के बारे में।

Chaitra Navratri 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026, गुरुवार से प्रारंभ होगी और इसका समापन 27 मार्च 2026, शुक्रवार को राम नवमी के पावन पर्व के साथ होगा।

नवरात्रि प्रारंभ: 19 मार्च 2026 (प्रतिपदा)

नवरात्रि समापन: 27 मार्च 2026 (नवमी)

Ghatasthapana Shubh Muhurat घटस्थापना शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। सही मुहूर्त में स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

19 मार्च 2026 के लिए शुभ मुहूर्त:

प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06.52 बजे से सुबह 7.43 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक। (यह समय कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार के दोष का प्रभाव नहीं रहता)।

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Importance of Chaitra Navratri चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसके पहले दिन से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए यह समय नए संकल्प और नई ऊर्जा के साथ वर्ष की शुरुआत करने का होता है। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था, जिसे राम नवमी के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म इस नवरात्रि के महत्व को दोगुना कर देता है, क्योंकि यह शक्ति की साधना के साथ-साथ मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

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