Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Feb, 2026 01:26 PM

प्रयागराज की पावन त्रिवेणी पर चल रहे माघ मेला 2026 का आध्यात्मिक सफर अब अपने अंतिम और सबसे दिव्य पड़ाव की ओर बढ़ चला है। माघ पूर्णिमा के भव्य स्नान के बाद, अब संगम तट पर श्रद्धालुओं को साल के सबसे बड़े महास्नान यानी महाशिवरात्रि का इंतजार है।
Maha Shivratri 2026 Magh Mela : प्रयागराज की पावन त्रिवेणी पर चल रहे माघ मेला 2026 का आध्यात्मिक सफर अब अपने अंतिम और सबसे दिव्य पड़ाव की ओर बढ़ चला है। माघ पूर्णिमा के भव्य स्नान के बाद, अब संगम तट पर श्रद्धालुओं को साल के सबसे बड़े महास्नान यानी महाशिवरात्रि का इंतजार है। यह पर्व न केवल कल्पवास की स्मृतियों को समेटने का है, बल्कि मोक्ष की कामना के साथ संगम में आखिरी डुबकी लगाने का भी है। माघ पूर्णिमा के स्नान के साथ ही संगम की रेती पर एक महीने से चल रहा कठिन 'कल्पवास' औपचारिक रूप से संपन्न हो गया है। हालांकि, मेले की आध्यात्मिक ऊर्जा अभी कम नहीं हुई है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि का स्नान माघ मेले का 'शाही समापन' होता है, जहां शिव और शक्ति के मिलन के दिन गंगा-यमुना में डुबकी लगाने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। तो आइए जानते हैं महाशिवरात्रि महास्नान की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में-
महाशिवरात्रि महास्नान की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी रविवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:00 बजे से 5:30 तक है। वैसे तो शिवरात्रि पर पूरे दिन स्नान का महत्व है, लेकिन सूर्योदय के समय त्रिवेणी में डुबकी लगाना विशेष फलदायी होता है।

मेले का समापन और विदाई की बेला
महाशिवरात्रि का स्नान उन करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आखिरी अवसर होता है जो माघ पूर्णिमा के बाद भी मेले में रुके हुए हैं। इस दिन सभी प्रमुख अखाड़ों के संत और तपस्वी अंतिम स्नान कर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं। 2 करोड़ से अधिक की भीड़ को संभालने के बाद, प्रशासन अब 15 फरवरी के अंतिम रेले के लिए घाटों को दोबारा व्यवस्थित कर रहा है।महाशिवरात्रि के बाद धीरे-धीरे तंबू उखड़ने लगते हैं और तम्बुओं का शहर फिर से शांत रेती में बदलने लगता है।

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