Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Jan, 2026 12:31 PM

Pradosh Vrat January 2026 Date and Time: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाने का अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर...
Pradosh Vrat January 2026 Date and Time: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाने का अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर करने और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए यह जानना जरूरी है कि जनवरी 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा, साथ ही पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

कब है जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत? (Pradosh Vrat January 2026 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि
प्रारंभ: 30 जनवरी 2026, सुबह 11:09 बजे
समापन: 31 जनवरी 2026, सुबह 08:25 बजे
चूंकि प्रदोष काल 30 जनवरी 2026 को पड़ रहा है, इसलिए प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। शुक्रवार होने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा।

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Puja Shubh Muhurat)
30 जनवरी 2026 को प्रदोष व्रत के दिन
प्रदोष काल प्रारंभ: शाम 05:59 बजे
प्रदोष काल समाप्त: रात 08:37 बजे
इस दौरान लगभग 2 घंटे 38 मिनट तक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का अत्यंत शुभ समय रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इसी अवधि में की गई पूजा शीघ्र फल प्रदान करती है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
व्रत का संकल्प लें।
शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग की स्थापना करें।
शिवलिंग पर गंगाजल, दूध या पंचामृत अर्पित करें।
बेलपत्र, धतूरा, भस्म, फल और फूल चढ़ाएं।
घी का दीपक और धूप जलाएं।
प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व (Pradosh Vrat Significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से
जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
रोग, शोक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से वैवाहिक जीवन और भौतिक सुखों को मजबूत करता है।
मृत्यु के बाद शिवलोक की प्राप्ति होती है।
कहा जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विचरण करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।