Bhauma Pradosh Vrat 2026 : सावन के आखिरी प्रदोष पर बन रहा खास योग, जानें पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 20 Aug, 2026 12:19 PM

bhauma pradosh vrat 2026

सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व है। जब भी प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। सावन का आखिरी प्रदोष व्रत भगवान शिव और मंगल देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का बहुत खास अवसर है।

Bhauma Pradosh Vrat 2026 : सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व है। जब भी प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। सावन का आखिरी प्रदोष व्रत भगवान शिव और मंगल देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का बहुत खास अवसर है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजन करने से मन की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में आने वाली हर परेशानी से छुटकारा मिलता है। साथ ही कुंडली का मंगल दोष शांत होता है। तो आइए जानते हैं सावन के आखिरी प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और योग के बारे में-

सावन का अंतिम प्रदोष 2026 डेट
पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि​ 25 अगस्त को सुबह में 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 26 अगस्त को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर होगी। उदयातिथि के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 26 अगस्त को है, लेकिन सावन का अंतिम प्रदोष यानि भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त दिन मंगलवार को रखा जाएगा।

भौम प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
भौम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 51 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ​शिव पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 13 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। 

ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 11 मिनट तक। 
अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त देर रात 12 बजकर 01 मिनट से लेकर 26 अगस्त को 12 बजकर 45 मिनट तक। 

शुभ योग
समय धार्मिक मान्यता और फल
त्रिपुष्कर योग प्रातः 05:55 से सुबह 06:20 तक इस अवधि में किए गए दान, स्नान या धार्मिक कार्य का फल तीन गुना होकर मिलता है।
आयुष्मान् योग प्रातःकाल से सुबह 07:41 तक इस योग में पूजा-अर्चना करने से दीर्घायु और निरोगी जीवन का वरदान प्राप्त होता है।
सौभाग्य योग सुबह 07:41 के बाद से देर रात तक यह योग सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में मधुरता और भाग्योदय कारक माना जाता है।
रवि योग रात्रि 10:51 से अगले दिन (26 अगस्त) सुबह 05:56 तक इस सूर्य-प्रभावित योग में किए गए कार्यों से नकारात्मकता दूर होती है और सफलता मिलती है।

 

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