Edited By Sarita Thapa,Updated: 10 Aug, 2026 12:42 PM

हिंदू धर्म में सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली सावन शिवरात्रि का बहुत खास महत्व है। यह दिन शिव जी की पूजा करने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
Sawan 2026 Shivratri Jalabhishek : हिंदू धर्म में सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली सावन शिवरात्रि का बहुत खास महत्व है। यह दिन शिव जी की पूजा करने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव जी की अराधना करने और व्रत रखने से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों से छुटकारा मिलता है। लेकिन इस बास सावन की शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने के कारण जलाभिषेक का समय थोड़ा बदल जाएगा क्योंकि भद्रा काल में किसी भी शुभ काम को करने की सख्त मनाही होती है। तो आइए जानते हैं भद्रा का समय कब से कब तक रहेगा और जलाभिषेक का सबसे उत्तम और दोषमुक्त मुहूर्त क्या है।
सावन शिवरात्रि पर पड़ेगा भद्रा का साया
इस साल सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया पड़ रहा है और भद्रा को किसी भी शुभ काम के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। 11 अगस्त को भद्राकाल का आरंभ प्रातः 4 बजकर 56 मिनट से हो रहा है और इसका समापन 11 अगस्त दोपहर 3 बजकर 24 मिनट पर होगा।
सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग के जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
ब्रह्रा मुहूर्त- 11 अगस्त प्रातः 5 बजकर 23 मिनट से लेकर प्रातः 6 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त-11 अगस्त, दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- 11 अगस्त, रात्रि 9 बजकर 13 मिनट से रात्रि 9 बजकर 32 मिनट तक
निशिता काल का मुहूर्त- 11 अगस्त मध्यरात्रि 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
जल चढ़ाते समय ध्यान रखें ये महत्वपूर्ण नियम
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके खड़े हों। कभी भी पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जल न चढ़ाएं।
शिवजी को तांबे, पीतल या चांदी के लोटे से जल अर्पित करें। जल की धारा बेहद पतली और धीमी होनी चाहिए, जल्दबाजी में जल न ढारें।
शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही की जाती है। जहां से जल बहकर बाहर निकलता है, उसे कभी भी लांघना नहीं चाहिए।
पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें, उसके बाद ही चंदन, भस्म, अक्षत और बेलपत्र चढ़ाएं। बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए।
भगवान शिव को कभी भी रोली या कुमकुम न चढ़ाएं। महादेव को हमेशा सफेद चंदन, भस्म या अष्टगंध का तिलक लगाएं।
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