Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 May, 2026 10:53 AM

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि यानी की देवताओं की भूमि भी कहा जाता है। क्योंकि यह अपनी समृद्ध संस्कृति और पांरपरिक मोलों के लिए दुनिया भर में प्रसद्धि है।
Biggest Shitala Mata Mela in Himachal Pradesh : हिमाचल प्रदेश को देवभूमि यानी की देवताओं की भूमि भी कहा जाता है। क्योंकि यह अपनी समृद्ध संस्कृति और पांरपरिक मोलों के लिए दुनिया भर में प्रसद्धि है। वहीं, सुंदरनगर क्षेत्र के भौण कलौहड़ गांव में हर साल बहुत ही उत्साह और धूम-धाम के साथ शीतला माता का वार्षिक मेला मनाया जाता है। इस मेले में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से भी लोग भारी संख्या में शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह भारी आकर्षण का क्रेंद होता है।
मेले का आयोजन और मुख तिथियां
शीतला माता का यह मेला हर साल गर्मियों के महीने में खासतौर पर जून में आयोजित किया जाता है। इस चार दिवसीय मेले की शुरुआत 9 जून से होती है और इसका समापन 12 जून को होता है। माना जाता है कि इस चार दिन के दिव्य दिनों में पूरा क्षेत्र भक्त और उत्सव के रंग में रंग जाता है। इन चार दिनों के दौरान माता के मंदिर में श्रद्धालु माता शीतला की कृपा प्राप्त करने और माता की खास पूजा-अर्चना करने के लिए भारी संख्या में पहुंचते हैं।
पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक
चार दिनों तक चलने वाले इस मेले में माता की पूजा-अर्चना के दूर-दराज से आए लोगों को हिमाचल की पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक को बहुत करीब से देखने को मिलता है। मेले की रात को स्थानीय कलाकारों के द्वारा खास कार्यक्रम पेश किया जाता है, जिसमें हिमाचल का प्रमुख नाच नाटी मुख्य आकर्षण का क्रेंद होता है। यह मेला न केवल आस्था की प्रतीक है, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा अपनी संस्कृति परंपराओं को सहेजने की भी महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
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