Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Mar, 2026 07:32 AM

Chaitra Navratri And Bhutadi Amavasya 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि...
Chaitra Navratri And Bhutadi Amavasya 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी।
इस बार नवरात्रि की शुरुआत एक विशेष संयोग में हो रही है, क्योंकि जिस दिन नवरात्रि शुरू हो रही है उसी दिन चैत्र मास की अमावस्या भी पड़ रही है। इस अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तंत्र-मंत्र, साधना और आध्यात्मिक क्रियाओं का विशेष महत्व होता है। ऐसे में नवरात्रि और भूतड़ी अमावस्या का एक साथ पड़ना इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है।
क्या होती है भूतड़ी अमावस्या
लोक मान्यताओं के अनुसार भूतड़ी अमावस्या के दिन नकारात्मक या अदृश्य शक्तियों की सक्रियता बढ़ जाती है। इसलिए इस दिन तंत्र साधना, आध्यात्मिक अभ्यास और विशेष पूजा-पाठ किए जाते हैं।
इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन दान-पुण्य और पूजा करके अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा
चूंकि इस बार भूतड़ी अमावस्या के दिन ही नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, इसलिए इस दिन सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना (घटस्थापना) करके माता रानी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को मां को फल, फूल और भोग अर्पित करना चाहिए।

पूजा के दौरान:
दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
माता रानी का ध्यान करके उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
भूतड़ी अमावस्या के दिन क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है:
किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
पितरों की शांति के लिए तर्पण या श्राद्ध कर्म करें।
जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करें।
पीपल के पेड़ की पूजा करें और वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
भगवान और देवी-देवताओं के मंत्रों का जप करें।
इन कार्यों को करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भूतड़ी अमावस्या के दिन क्या न करें
भूतड़ी अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:
रात के समय सुनसान या एकांत स्थान पर अकेले न जाएं।
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन जैसे लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
इस दिन बाल और नाखून न काटें।
घर में कलह या विवाद न करें और किसी को अपशब्द न कहें।
सूर्योदय के बाद देर तक सोने से बचें और दिन की शुरुआत पूजा-पाठ से करें।
नवरात्रि का धार्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि शक्ति और भक्ति का पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और साधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस साल भूतड़ी अमावस्या के साथ नवरात्रि की शुरुआत होने से भक्तों के लिए यह दिन और भी अधिक आध्यात्मिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
