Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Oct, 2026 09:09 AM

दिवाली पर घर चमकाने की तैयारी है, लेकिन दीवारों पर नया रंग चढ़ाने से पहले जेब का हिसाब लगाना जरूरी हो गया है। पेंट, पुट्टी, प्राइमर और दूसरे सामान की लागत के साथ मजदूरी का खर्च भी रंगाई-पुताई का बजट बढ़ा सकता है।
नई दिल्ली (ज्ञानप्रकाश/ नवोदय टाइम्स): दिवाली पर घर चमकाने की तैयारी है, लेकिन दीवारों पर नया रंग चढ़ाने से पहले जेब का हिसाब लगाना जरूरी हो गया है। पेंट, पुट्टी, प्राइमर और दूसरे सामान की लागत के साथ मजदूरी का खर्च भी रंगाई-पुताई का बजट बढ़ा सकता है।
ऐसे में घर को नया रूप देने की योजना बना रहे लोगों के सामने सवाल है कि ब्रांडेड पेंट चुनें, सामान्य डिस्टेंपर कराएं या कम खर्च में सफेदी से ही काम चलाएं। त्योहार नजदीक आने के साथ काम की मांग और पेंटरों की उपलब्धता भी लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है।
पांच साल में कितनी बढ़ी महंगाई: पिछले पांच वर्षों में पेंट, पुट्टी, चूना और मजदूरी की कीमतों में कुल कितनी वृद्धि हुई, इसका एकसमान और विश्वसनीय दिल्ली बाजार-आधारित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2021 और 2026 के थोक बाजार के बिलों तथा वर्षवार मूल्य सूचियों की तुलना से ही सटीक बढ़ोतरी का आकलन किया जा सकता है।
गुणवत्ता से समझौता ना करें: पेंट खरीदते समय गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पेंट में लेड यानी सीसे की अधिक मात्रा बच्चों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए केवल कम कीमत देखकर घटिया या मानकहीन उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए।
बजट बचाने के लिए क्या करें
रंगाई-पुताई शुरू कराने से पहले दीवारों का क्षेत्रफल मापें, सामग्री और मजदूरी का खर्च अलग-अलग पूछें तथा कम से कम दो-तीन कोटेशन लें। ठेकेदार से यह भी स्पष्ट कर लें कि पुट्टी, प्राइमर, घिसाई, सफाई और पेंट के कितने कोट शामिल हैं। इससे त्योहार की तैयारियों के बीच अनावश्यक खर्च से बचते हुए घर को नया रूप दिया जा सकता है।