Edited By Prachi Sharma,Updated: 08 Mar, 2026 01:08 PM

Ear Piercing Muhurat 2026 : भारतीय परंपरा में कर्णछेदन केवल श्रृंगार या फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि कानों को छिदवाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के...
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Ear Piercing Muhurat 2026 : भारतीय परंपरा में कर्णछेदन केवल श्रृंगार या फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि कानों को छिदवाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। आज के आधुनिक युग में भले ही हम इसे पियर्सिंग कहकर फैशन से जोड़ दें लेकिन इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक महत्व को नकारा नहीं जा सकता। आइए विस्तार से जानते हैं कर्णछेदन के 5 बड़े लाभ और वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त।
कर्णछेदन संस्कार अप्रैल मुहूर्त 2026
18 अप्रैल 2026 सुबह 06:24 – सुबह 07:50
18 अप्रैल 2026 सुबह 09:46 – दोपहर 12:00
23 अप्रैल 2026 सुबह 07:31 – सुबह 11:40
23 अप्रैल 2026 दोपहर 14:01 – शाम 18:35
24 अप्रैल 2026 सुबह 09:22 – दोपहर 13:53
24 अप्रैल 2026 शाम 16:15 – शाम 18:30
29 अप्रैल 2026 सुबह 07:07 – सुबह 09:03
29 अप्रैल 2026 सुबह 11:17 – शाम 18:10
कर्णछेदन संस्कार मई मुहूर्त 2026
1 मई 2026 सुबह 10:59 – दोपहर 15:51
1 मई 2026 शाम 17:48 – रात 19:02
2 मई 2026 सुबह 07:01 – सुबह 08:57
2 मई 2026 सुबह 11:12 – दोपहर 13:39
3 मई 2026 शाम 17:36 – रात 19:00
6 मई 2026 सुबह 09:02 – दोपहर 13:11
8 मई 2026 सुबह 11:39 – दोपहर 14:05
9 मई 2026 दोपहर 14:03 – शाम 18:20
10 मई 2026 सुबह 06:49 – सुबह 10:36
10 मई 2026 दोपहर 12:58 – दोपहर 14:01
16 मई 2026 दोपहर 12:36 – शाम 18:00
कर्णछेदन के 5 अद्भुत स्वास्थ्य और ज्योतिषीय लाभ
मानसिक एकाग्रता और याददाश्त में वृद्धि
आयुर्वेद के अनुसार कान में कई ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं जो सीधे मस्तिष्क से जुड़े होते हैं। जब कर्णछेदन किया जाता है तो इन बिंदुओं पर हल्का प्रभाव पड़ता है, जिससे दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। इससे व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ने और स्मरण शक्ति मजबूत होने में सहायता मिलती है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से भी माना जाता है कि कान छिदवाने से बुध और गुरु ग्रह का सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जो बुद्धि, ज्ञान और समझ को बढ़ाने में सहायक होता है।
स्वास्थ्य से जुड़े फायदे
कर्णछेदन को पारंपरिक मान्यताओं में स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है और सिरदर्द जैसी समस्याओं में भी कुछ हद तक राहत मिलती है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सनातन धर्म में कर्णछेदन को अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। इसे हिंदू धर्म के षोडश संस्कारों में शामिल किया गया है। यह संस्कार व्यक्ति को अपनी परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का एक माध्यम माना जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में कर्णवेध संस्कार का उल्लेख शुभ और रक्षक संस्कार के रूप में किया गया है। धार्मिक मान्यता है कि यह संस्कार व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाने में सहायक होता है और साथ ही उसकी बुद्धि और विवेक के विकास में भी मदद करता है।