Narasimha Dwadashi 2026: कब है नरसिंह द्वादशी? जानिए शुभ तिथि, पारण समय और संपूर्ण पूजा विधि

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 10:00 AM

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Narasimha Dwadashi 2026: हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जो भगवान विष्णु के उग्र और दिव्य अवतार नरसिंह को समर्पित है। यह दिन धर्म की विजय, भक्त की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और...

Narasimha Dwadashi 2026: हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जो भगवान विष्णु के उग्र और दिव्य अवतार नरसिंह को समर्पित है। यह दिन धर्म की विजय, भक्त की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा जीवन में साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं नरसिंह द्वादशी 2026 की सही तिथि, पारण का समय, धार्मिक महत्व और सरल पूजा विधि।

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Narasimha Dwadashi 2026 Date: नरसिंह द्वादशी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार:
द्वादशी तिथि प्रारंभ –
27 फरवरी 2026, रात्रि 10:32 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त – 28 फरवरी 2026, रात्रि 08:43 बजे
उदया तिथि के अनुसार व्रत 28 फरवरी 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा।

द्वादशी पारण समय 2026
पारण तिथि –
1 मार्च 2026
पारण समय – प्रातः 06:21 बजे से 08:41 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार पारण समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि निर्धारित समय में व्रत खोलना शुभ फलदायक माना गया है।

नरसिंह द्वादशी का धार्मिक महत्व
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को यह पावन व्रत किया जाता है। पुराणों में वर्णन है कि भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु अपने चौथे अवतार नरसिंह रूप में प्रकट होकर अत्याचारी असुर राजा हिरण्यकशिपु का संहार किया था। भगवान नरसिंह का स्वरूप आधा मनुष्य और आधा सिंह था। यह अवतार दर्शाता है कि जब भी धर्म संकट में पड़ता है, तब ईश्वर स्वयं अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं।

यह व्रत विशेष रूप से भय और शत्रु बाधा से मुक्ति देता है। मानसिक तनाव दूर करता है। आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है।
घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

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नरसिंह द्वादशी 2026 पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
इस दिन पूजा श्रद्धा और नियम से करनी चाहिए। सरल विधि इस प्रकार है प्रातःकालीन तैयारी, ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।

स्थापना और पूजन
घर के मंदिर को साफ करें। भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि उपलब्ध न हो तो भगवान विष्णु की तस्वीर रखकर भी पूजा कर सकते हैं। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें।

अभिषेक और अर्पण
पंचामृत से अभिषेक करें। पीले पुष्प, अक्षत, तुलसी दल, फल और मिष्ठान अर्पित करें। धूप-दीप प्रज्वलित करें।

मंत्र जाप और पाठ
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। नरसिंह स्तोत्र या नरसिंह मंत्रों का जाप करें।

आरती और भोग
सात्विक भोग लगाएं। आरती करें और प्रसाद परिवार में बांटें।

नरसिंह द्वादशी व्रत के नियम
इस दिन सात्विक भोजन करें। लहसुन-प्याज से परहेज रखें। क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें।

Narasimha Dwadashi 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और विश्वास का पर्व है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से हर संकट का समाधान संभव है। भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में शक्ति, साहस और सुरक्षा बनी रहे। यही इस पावन दिवस का संदेश है।

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