Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Mar, 2026 12:45 PM

Nag Panchami 2026 Date: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन नाग देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। सावन महीने में आने वाला यह पर्व प्रकृति,...
Nag Panchami 2026 Date: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन नाग देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। सावन महीने में आने वाला यह पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और सर्पों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन महिलाएं व्रत रखकर नाग देवता की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि व सुरक्षा की कामना करती हैं। विशेष रूप से यह पूजा भाइयों और परिवार के सदस्यों को सर्पदंश के भय से बचाने के लिए की जाती है।
Nag Panchami 2026 Date: कब मनाई जाएगी नाग पंचमी?
हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
नाग पंचमी: 17 अगस्त 2026, शुक्रवार
पूजा मुहूर्त: सुबह 05:51 बजे से 08:29 बजे तक
पंचमी तिथि आरंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 04:52 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 05:00 बजे
इस दिन सुबह शुभ मुहूर्त में नाग देवता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर किन नागों की पूजा होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन विशेष रूप से 12 नाग देवताओं की पूजा की जाती है। इन नागों का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी मिलता है। इन 12 नाग देवताओं के नाम इस प्रकार हैं: अनन्त, वासुकी, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल। इन नाग देवताओं की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और सुरक्षा की प्राप्ति होती है।

नाग पंचमी पर नागों की पूजा क्यों की जाती है?
नाग पंचमी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय नागों ने अपनी माता की आज्ञा का पालन नहीं किया था। इससे क्रोधित होकर उनकी माता ने उन्हें श्राप दिया कि वे राजा जनमेजय के यज्ञ में भस्म हो जाएंगे।
श्राप से भयभीत होकर सभी नाग ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे। तब ब्रह्मा जी ने बताया कि नागवंश में जन्म लेने वाले आस्तिक मुनि ही उनकी रक्षा करेंगे।
जब राजा जनमेजय ने नाग यज्ञ शुरू किया, तब अनेक नाग यज्ञ की अग्नि में गिरने लगे। उसी समय आस्तिक मुनि ने नागों को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया और उनके ऊपर दूध डालकर उन्हें अग्नि से राहत दी।
कहा जाता है कि यह घटना सावन शुक्ल पंचमी के दिन हुई थी। इसी कारण इस तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाने लगा।

समुद्र मंथन से जुड़ी मान्यता
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन हो रहा था, तब देवताओं और दानवों को मंथन के लिए रस्सी नहीं मिल रही थी। उस समय वासुकी नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया।
इस महान कार्य के कारण नागों का सम्मान बढ़ा और तभी से इस तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में नागों को प्रकृति के रक्षक और शक्तिशाली जीव माना गया है। नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा करने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं और परिवार की रक्षा होती है।
मान्यता है कि इस दिन नाग देवता को दूध अर्पित करने और पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
