Ganesh Kuber Story: गणेश जी और कुबेर की सुंदर कथा से जानें, बुद्धि बड़ी या धन

Edited By Updated: 23 Sep, 2025 03:24 PM

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Bal Ganesh and Kuber Story: गणेश जी और धन के देवता कुबेर का संबंध धर्मग्रंथों में विशेष रूप से उल्लेखित है। गणेश जी विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माने जाते हैं, जबकि कुबेर धन और ऐश्वर्य के अधिपति हैं। बुद्धि और धन के देवता का एक प्रसंग है, जिससे यह...

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Bal Ganesh and Kuber Story: गणेश जी और धन के देवता कुबेर का संबंध धर्मग्रंथों में विशेष रूप से उल्लेखित है। गणेश जी विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माने जाते हैं, जबकि कुबेर धन और ऐश्वर्य के अधिपति हैं। बुद्धि और धन के देवता का एक प्रसंग है, जिससे यह शिक्षा मिलती है कि धन अकेले पर्याप्त नहीं है। उसे बुद्धि, विनम्रता और संयम के साथ ही सार्थक बनाया जा सकता है। गणेश जी और कुबेर का यह संबंध हमें बताता है कि वैभव और विद्या का संतुलन ही जीवन को सुखी और सफल बनाता है। पूजा में गणेश और कुबेर दोनों का आह्वान साथ में किया जाता है। आइए जानें क्या है वो प्रसंग-

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एक बार की बात है। कुबेर को अपने धन-वैभव पर बहुत अभिमान हो गया था। उन्होंने सोचा कि मेरे पास इतनी समृद्धि है, तो क्यों न मैं शंकर जी को अपने घर पर भोजन का न्यौता दूं और उन्हें अपना वैभव दिखाऊं। यह विचार लेकर कुबेर कैलाश पर्वत पर गए और वहां शंकर जी को भोजन पर पधारने का न्यौता दिया। शंकर जी को कुबेर के आने का उद्देश्य समझ आ गया था। वह समझ गए थे कि कुबेर भोजन के बहाने उन्हें अपना वैभव दिखाना चाहते हैं। 

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उन्होंने कुबेर से कहा, हम तो नहीं आ सकेंगे। आप इतने आदर से न्यौता देने आए हैं तो हम गणेश को भेज देंगे। शंकर जी और माता पार्वती ने गणेश जी से कुबेर के साथ जाने को कहा। गणेश जी सहज ही राजी हो गए। गणेश जी को भी ज्ञात हो गया था कि कुबेर ने उन्हें भोजन पर क्यों बुलाया है और गणेश जी उनका अभिमान तोड़ने की युक्ति में जुट गए। वे अपने साथ मूषक को भी ले गए। 

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कुबेर के महल में गणेश जी और उनके मूषक को भोजन परोसना शुरू किया गया। दिखावे के लिए सोने-चांदी के पात्रों में अति स्वादिष्ट पकवान परोसे गए। गणेश जी ने एक-एक कर उन्हें खाना शुरू किया, कुछ ही समय में सारे पकवान समाप्त हो गए। गणेश जी की भूख शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब उन्होंने बर्तन खाने शुरू कर दिए। हीरे-मोती, जवाहरात सब खाने के बाद भी गणेश जी की भूख शांत नहीं हुई। कुबेर परेशान हो गए लेकिन उन्हें अपनी भूल का भी एहसास हो गया था। घबराकर वह शंकर जी के पास आए और हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोले, ‘‘मैं अपने कर्म से शर्मिंदा हूं और समझ गया हूं कि मेरा अभिमान आपके आगे कुछ नहीं।’’ 

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तब कहीं जाकर गणेश लौटे लेकिन धन के देवता को सबक सिखाने में कामयाब रहे।

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