आज कन्याओं के इस रुप में रहता है मां ब्रह्मचारिणी का वास, पूरी करें हर आस !

Edited By Updated: 08 Oct, 2021 07:27 AM

goddess brahmacharini

आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। दाहिने हाथ में जप माला व बाएं हाथ में कमंडल लिए हुए सफेद वस्त्रों से सुशोभित माता का यह रूप देवी ब्रह्मचारिणी के नाम में जाना जाता है। जो कि नवरात्रि के दूसरे दिन

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Shardiya Navratri 2021: आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। दाहिने हाथ में जप माला व बाएं हाथ में कमंडल लिए हुए सफेद वस्त्रों से सुशोभित माता का यह रूप देवी ब्रह्मचारिणी के नाम में जाना जाता है। जो कि नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजन देवी हैं। कठोर तपस्या करने के कारण इन्हें तपश्चारिणी भी कहा जाता है। देवी ब्रह्मचारिणी का यह रूप माता पार्वती के ब्रह्मचर्य जीवन की पालना को दर्शाता है। जिससे कि देवी के इस रूप को मां ब्रह्मचारिणी रूप माना गया है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 18 वर्षों तक तपस्वी के भांति जीवन व्यतीत किया व जंगलों में जाकर भगवान शिव की कठोर साधना की और वरदान के रूप में भगवान शिव को पति के रूप में पाया। देवी का यह रूप जीवन में अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ता का सूचक है।

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Which goddess is worshipped on second day of Navratri: ज्योतिषीय नजरिया से देवी ब्रह्मचारिणी का यह रूप मंगल ग्रह का द्योतक माना जाता है। माता का यही रूप परम शांति विजय दिलाने वाला होता है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के इस रूप की पूजा करने से भक्त अपने जीवन के कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें विजय प्राप्त होती है, ईश्वर की प्राप्ति भी मिलती है।

Navratri Puja Maa Brahmacharini: देवी ब्रह्मचारिणी का पूजन करते समय कुछ खास वस्तुओं का प्रयोग करने से सौभाग्य व विजय की प्राप्ति होती है। प्रात: काल में देवी के चित्र के आगे नतमस्तक होते हुए उन्हें सफेद फूल और घर में बने सादे भोजन का भोग अवश्य लगाएं।

माता ब्रह्मचारिणी को मखाने, पंच मेवे, देसी घी, मिश्री व बताशे का भोग लगाने से देवी जल्द ही प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को अपनी इच्छा का वरदान देती हैं।

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Brahmacharini mantra: श्वेत आसन पर देवी के आगे हाथों में सफेद पुष्प लिए हुए इन मंत्रों का उच्चारण 108 बार करें।

मंत्र : या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

देवी ब्रह्मचारिणी का वास विवाह योग कन्याओं में माना जाता है। आज के दिन कन्या का किसी भी रूप में अनादर न करें और यथाशक्ति छोटी कन्याओं को दान करें।

नीलम
8847472411

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