Holika Dahan 2026 : होलिका दहन के दौरान भूलकर भी न जलाएं इन पेड़ों की लकड़ियां, पड़ सकता है बुरा असर

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 03:45 PM

holika dahan 2026

Holika Dahan 2026 : हिंदू धर्म में होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का एक शक्तिशाली प्रतीक है। वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसमें हम...

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Holika Dahan 2026 : हिंदू धर्म में होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का एक शक्तिशाली प्रतीक है। वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसमें हम अपनी नकारात्मकता और अहंकार की आहुति देते हैं। अक्सर लोग होलिका दहन के लिए किसी भी पेड़ की लकड़ियां इकट्ठा कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों और वास्तु विज्ञान के अनुसार, सभी पेड़ों की लकड़ियां जलाना शुभ नहीं माना जाता। कुछ विशेष पेड़ों की लकड़ियों को जलाने से न केवल वास्तु दोष लगता है, बल्कि देवी-देवताओं की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि होलिका दहन में किन पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए और इसके पीछे के धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या हैं।

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इन पेड़ों की लकड़ियां कभी न जलाएं
होलिका दहन के लिए लकड़ियों का चुनाव करते समय निम्नलिखित पेड़ों से बचना अनिवार्य है:

पीपल
पीपल को हिंदू धर्म में देव वृक्ष माना जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूं। पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ पितरों का वास माना जाता है। इसे जलाने से पितृ दोष लगता है और वंश वृद्धि में बाधा आ सकती है।
 
बरगद
बरगद के पेड़ को वट वृक्ष कहा जाता है और यह दीर्घायु व स्थिरता का प्रतीक है। वट सावित्री जैसे व्रतों में इसकी पूजा की जाती है। इसकी लकड़ियां जलाने से परिवार की सुख-शांति भंग हो सकती है। इसे शिव का स्वरूप माना जाता है, अतः इसे अग्नि के हवाले करना वर्जित है।

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शमी
शमी का पेड़ शनि देव और भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। शमी की लकड़ी का उपयोग यज्ञ की समिधा के रूप में किया जाता है न कि कूड़े-कचरे के साथ जलाने के लिए। इसे जलाने से शनि देव का प्रकोप झेलना पड़ सकता है और घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।

 आम
भले ही आम की लकड़ियों का उपयोग हवन में किया जाता है लेकिन होलिका दहन के समय हरी भरी आम की टहनियां काटना वर्जित है।  फाल्गुन मास में आम के पेड़ों पर मंजर  आने लगते हैं। इस समय पेड़ को काटना उसकी संतान को नष्ट करने जैसा माना जाता है।

नीम और केला
नीम का उपयोग औषधि के रूप में होता है और केले को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों की लकड़ियों को होलिका की अग्नि में जलाना अशुभ माना गया है।
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