Edited By Sarita Thapa,Updated: 13 Apr, 2026 09:46 AM

पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर और अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) के बीच रथ यात्रा की तारीखों को लेकर विवाद गहरा गया है।
Jagannath Temple vs ISKCON : पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर और अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) के बीच रथ यात्रा की तारीखों को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला इतना बढ़ चुका है कि जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने अब कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विवाद की मुख्य वजह: असामयिक रथ यात्रा
जगन्नाथ संस्कृति और शास्त्रों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रतिवर्ष 'आषाढ़ शुक्ल द्वितीया' को ही निकाली जाती है। पुरी के गजपति महाराज दिब्यसिंह देब का कहना है कि इस्कॉन दुनिया के कई हिस्सों में शास्त्रों द्वारा निर्धारित तिथि के अलावा अन्य तारीखों पर रथ यात्रा और स्नान यात्रा निकाल रहा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह सदियों पुरानी परंपरा और धार्मिक मान्यताओं का सीधा उल्लंघन है, जिससे करोड़ों भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं।
ये भी पढ़े- Char Dham Yatra 2026 : श्रद्धालुओं के लिए राहत या सख्ती? हाई कोर्ट के अल्टीमेटम के बाद अब नए नियमों में होगी चारधाम यात्रा
पीएम मोदी और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद गजपति महाराज ने बताया कि इस गंभीर विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानकारी दी गई है। मंदिर प्रशासन इस मामले को विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के समक्ष भी उठाएगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इन 'असामयिक' यात्राओं को रोका जा सके। गजपति महाराज ने स्पष्ट किया कि यदि इस्कॉन ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो मंदिर प्रशासन अंतिम विकल्प के रूप में कानूनी रास्ता अख्तियार करेगा।
इस्कॉन का पक्ष और चुनौतियां
इस्कॉन ने पहले इस मामले पर अपनी कुछ व्यावहारिक दिक्कतें बताई थीं। इस्कॉन का तर्क रहा है कि विदेशों में रथ यात्रा के लिए स्थानीय सरकारों से अनुमति और स्वयंसेवकों की उपलब्धता वीकेंड पर ही संभव हो पाती है। इस्कॉन ने संकेत दिया था कि दुनिया भर के सैकड़ों केंद्रों में एक ही तिथि पर यात्रा निकालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ