Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 May, 2026 12:20 PM

Kainchi Dham Foundation Day 2026: जानें 15 जून को क्यों मनाया जाता है कैंची धाम स्थापना दिवस। बाबा नीम करोली महाराज के चमत्कार, पानी से घी बनने की कहानी और कैंची धाम नाम पड़ने का असली कारण।
Kainchi Dham Foundation Day 2026: देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित कैंची धाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्रतिवर्ष 15 जून को इस पवित्र स्थान पर बाबा नीम करोली के भक्तों का ऐसा रेला उमड़ता है कि पूरी घाटी 'जय बाबा की' के उद्घोष से गूंज उठती है। साल 2026 में होने वाला स्थापना दिवस समारोह भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन बाबा ने उस अलौकिक शक्ति केंद्र की नींव रखी थी, जहां आज दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज सिर झुकाते हैं।
विश्व भर में फैली बाबा की अलौकिक शक्तियां
नीम करौली बाबा को इस आश्रम में आने के बाद ही अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें नीम करौली बाबा का उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन तथा आशीर्वाद लेने के लिए आने लगे।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीम करौली में कठिन तप करके स्वयं ही नीम करौली बन गए। उनकी अलौकिक शक्तियां पूरे देश में, यहां तक की विश्व में इतनी अधिक चर्चा में आई कि उनका नाम किसी से अनजान नहीं रहा।

क्यों खास है 15 जून की तारीख?
कैंची धाम के इतिहास में 15 जून की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। दरअसल, बाबा नीम करोली महाराज पहली बार साल 1962 में इस स्थान पर आए थे। उन्हें यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहां आश्रम बनाने का निर्णय लिया। ठीक 2 साल बाद, 15 जून 1964 को आश्रम में हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई, जिसे आधिकारिक तौर पर स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पहाड़ियों की बनावट ने दिया 'कैंची' नाम
नीम करोली बाबा का कैंची धाम आश्रम नैनीताल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। क्षिप्रा नाम की छोटी पहाड़ी नदी के किनारे सन् 1962 में कैंचीधाम की स्थापना हुई। यहां दो घुमावदार मोड़ है जो कि कैंची के आकार के हैं इसलिए इसे कैंचीधाम आश्रम कहते हैं।
जब बाबा ने पानी को बना दिया था असली 'घी'
कहा जाता है कि एक बार यहां आयोजित भण्डारे में ‘घी’ की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने के लिए जब उपयोग में लाया गया तो वह जल ‘घी’ में परिवर्तित हो गया। इस चमत्कार से आस्थावान भक्तजन नतमस्तक हो गए।

वृन्दावन में हुआ था बाबा का धाम वास
10 सितम्बर 1973 में वृन्दावन की पावन भूमि पर नीम करौली बाबा का धाम वास हो गया लेकिन कैंची धाम आश्रम में अब भी विदेशी आते रहते हैं। बताया जाता है कि सबसे ज्यादा अमेरिकी ही इस आश्रम में आते हैं। आश्रम पहाड़ी इलाके में देवदार के पेड़ों के बीच है। यहां पांच देवी-देवताओं के मन्दिर हैं। इनमें हनुमान जी का भी एक मन्दिर है। भक्तों का मानना है कि बाबा खुद हनुमान जी के अवतार थे।
स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन
15 जून को कैंची धाम में भव्य मेले और विशाल भंडारे का आयोजन होता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु रातभर लाइन में लगकर बाबा के दर्शनों का इंतजार करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस दरबार में हाजिरी लगाता है, बाबा उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं।

बड़ी-बड़ी देशी-विदेशी हस्तियां थी बाबा की भक्त
बाबा राजा-रंक, अमीर-गरीब, सभी का समान रुप से पीड़ा-निवारण करते थे। उनके उपदेश लोगों को पतन से उबारते और सत्मार्ग-सत्पथ पर चलाते। हमेशा एक कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा के आर्शीवाद के लिए भारतीयों के साथ-साथ बड़ी-बड़ी विदेशी हस्तियां भी उनके आश्रम पर आती हैं। बाबा के उपलब्ध सभी फोटो कम्बल में हैं और भक्त भी उन्हें कम्बल ही भेंट करते थे।
पं. गोविंद वल्लभ पंत, डॉ सम्पूर्णानन्द, राष्ट्रपति वीवी गिरि, उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरुप पाठक, राज्यपाल व केन्द्रीय मन्त्री रहे के. एम. मुंशी, राजा भद्री, जुगल किशोर बिड़ला, महाकवि सुमित्रानन्दन पन्त, अंग्रेज जनरल मकन्ना, देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु और भी ऐसे अनेक लोग बाबा के दर्शन के लिए आते रहते थे।
फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब की प्रेरणा का स्थल कैंची धाम ही है। यहां नीम करौली बाबा का कैंची धाम आश्रम इनके अलावा कई सफल लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत साबित हुआ। एप्पल की नींव रखने से पहले स्टीव जॉब कैंची धाम आए थे। यहीं उनकों कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली थी। जिस वक्त फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग फेसबुक को लेकर कुछ तय नहीं कर पा रहे थे तो स्टीव जॉब ने ही उन्हें कैंची धाम जाने की सलाह दी थी। उसके बाद जुकरबर्ग ने यहां की यात्रा की और एक स्पष्ट विजन लेकर वापस लौटे। फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब के अलावा भारी संख्या में विदेशी साधक नीम करौली महाराज से जुड़े रहे हैं।
