पति की लंबी आयु के लिए रख रही हैं करवा चौथ व्रत, तो इन नियमों को न करें नजरअंदाज़

Edited By Updated: 12 Oct, 2022 12:57 PM

karwa chauth

करवा चौथ का इंतज़ार हर सुहागिन महिला को रहता है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनकर पूरा सज -धज कर पूरा दिन उपवास धारण करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। ऐसे में आपको बता दें, बाकि व्रतों की तरह ही इस व्रत के भी कुछ नियम हैं...

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करवा चौथ का इंतज़ार हर सुहागिन महिला को रहता है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनकर पूरा सज-धज कर पूरा दिन उपवास धारण करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। ऐसे में आपको बता दें, बाकि व्रतों की तरह ही इस व्रत के भी कुछ नियम हैं जिन्हें हर व्रती को अपनाना ज़रूरी है। तो जानते हैं करवा चौथ का व्रत धारण करने वाली महिलाओं को किन बातों को ध्यान रखना चाहिए।
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 हर साल ये त्योहार कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस साल 2022 में ये त्योहार 13 अक्तूबर को पड़ रहा है। करवा चौथ का पर्व सुहागिनों के लिए अत्यंात महत्व पूर्ण होता है। इस व्रत पर महिलाएं पूरा दिन निर्जला रहकर रात को चंद्र देव के दर्शनों के बाद ही व्रत खोलती हैं। 

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्र उदय तक रखा जाता है। यदि आपके यहां पर सरगी खाने का रिवाज है तो आप सूर्योदय से पहले सरगी खा लें। करवा चौथ के दिन महिलाओं को पीले या लाल रंग के वस्त्र ही धारण करने चाहिए। इस दिन काले और सफेद रंग के वस्त्र धारण करना निषेध माना जाता है।

करवा चौथ का व्रत निर्जल रहकर किया जाता है। लेकिन यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्य्र ह समस्या है तो आप करवा चौथ की कहानी सुनने के बाद जल ग्रहण कर सकती हैं। ये व्रत पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। इसलिए सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ के दिन पूरा श्रृंगार अवश्य करना चाहिए। चूंकि श्रृंगार को सुहाग ही निशानी माना जाता है और हिंदू धर्म में पति को सुहाग कहा जाता है। इसलिए इस दिन श्रृंगार ज़रूर करना शुभ माना जाता है।
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इस दिन करवा चौथ की कथा सुनने अनिवार्य होता है और करवा चौथ व्रत की कथा सुनते समय साबुत अनाज और मीठा साथ में अवश्य रखें। इस दिन कथा सुनने के बाद बहुओं को अपनी सास को बायना यानि सुहाग का समान देना चाहिए। इसमें खाने पीने की वस्तुएं, वस्त्र और श्रृंगार का समान रखना चाहिए। करवा चौथ की पूजा में मिट्टी का करवा विशेष माना जाता है। इसलिए इस दिन मिट्टी के करवे से ही करवा चौथ की पूजा की जाती है।

जब चंद्र निकल आएं तो उन्हेंल देखने के बाद ही अर्घ्य दें। करवा चौथ का व्रत पूर्ण होने के बाद पति का चेहरा अवश्य देंखे और उनका आशीर्वाद अवश्य लें। इसके अलावा घर के सभी बड़े-बुजुर्गों का पैर छूकर उनका आशीर्वाद अवश्य लें और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए करवा चौथ माता से क्षमा याचना जरूर कर लें। मान्य ता है कि ऐसा करने से चौथ माता अत्यंकत प्रसन्नि होती हैं और पति-पत्नीर को खुशियों का आशीर्वाद मिलता है।
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