Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Mar, 2026 12:20 PM

Som Pradosh Vrat Kab Hai 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और भगवान शिव (Lord Shiva) एवं माता पार्वती (Goddess Parvati) को समर्पित होता...
Som Pradosh Vrat Kab Hai 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और भगवान शिव (Lord Shiva) एवं माता पार्वती (Goddess Parvati) को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
चैत्र मास यानी मार्च 2026 के अंतिम प्रदोष व्रत को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं इस व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
मार्च 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत कब है?
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ:
30 मार्च 2026, सोमवार सुबह 07:10 बजे
त्रयोदशी तिथि का समापन:
31 मार्च 2026, मंगलवार सुबह 06:57 बजे
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल (संध्याकाल) में की जाती है। ऐसे में 30 मार्च को प्रदोष काल पड़ने के कारण इसी दिन व्रत रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत सोमवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन अनंग त्रयोदशी का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

सोम प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:41 AM – 05:27 AM
प्रातः सन्ध्या: 05:04 AM – 06:14 AM
अभिजित मुहूर्त: 12:01 PM – 12:51 PM
अमृत काल: 12:23 PM – 01:59 PM
विजय मुहूर्त: 02:30 PM – 03:19 PM
गोधूलि मुहूर्त: 06:37 PM – 07:00 PM
सायाह्न सन्ध्या: 06:38 PM – 07:47 PM
प्रदोष काल में पूजा करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
Pradosh Vrat का संबंध सीधे Lord Shiva की आराधना से है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य, आयु, धन और सुख-शांति के लिए रखा जाता है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
दिन भर व्रत रखें। (निर्जला या फलाहार)
भगवान शिव की पूजा बेलपत्र, अक्षत, धूप और गंगाजल से करें।
शाम के समय पुनः स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
गोबर से मंडप बनाकर रंगोली सजाएं।
उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें।
‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
प्रदोष व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करें।
कुछ श्रद्धालु शाम की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कई लोग अगले दिन पारण करते हैं।
मार्च 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत 30 मार्च, सोमवार को रखा जाएगा। यह सोम प्रदोष व्रत होने के कारण विशेष फलदायी माना जा रहा है। सही मुहूर्त में पूजा और श्रद्धा से व्रत करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
