Edited By Prachi Sharma,Updated: 18 Jan, 2026 10:19 AM

Kashi Manikarnika Ghat : एक समय विकास के मामले में पिछड़ा समझा जाने वाला बनारस अब तेज़ी से बदलती तस्वीर पेश कर रहा है। आज काशी केवल धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आधुनिक सुविधाओं और परंपराओं का सुंदर समन्वय भी दिखाई देता...
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Kashi Manikarnika Ghat : एक समय विकास के मामले में पिछड़ा समझा जाने वाला बनारस अब तेज़ी से बदलती तस्वीर पेश कर रहा है। आज काशी केवल धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आधुनिक सुविधाओं और परंपराओं का सुंदर समन्वय भी दिखाई देता है। इसी परिवर्तन की कड़ी में अब काशी के सबसे पवित्र श्मशान घाट मणिकर्णिका घाट को भी नया स्वरूप दिया जा रहा है।
महाश्मशान के नाम से प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर रोज़ाना सौ से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होता है। अब तक परिजनों को शव यात्रा के दौरान तंग गलियों, अव्यवस्थित रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ता था। लेकिन पुनर्विकास परियोजना के पूरा होने के बाद इन परेशानियों में काफी कमी आने की उम्मीद है।
बदलेगा मणिकर्णिका घाट का स्वरूप
पुनर्विकास योजना के तहत घाट परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां नए भवन, बैठने की समुचित व्यवस्था, दर्शन के लिए व्यू गैलरी, शौचालय, प्रतीक्षालय और शवों के लिए निर्धारित प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रहे परिजनों की सुविधा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि इस संवेदनशील स्थल की गरिमा बनी रहे।
मोक्ष की आस्था का केंद्र
मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व केवल वाराणसी तक सीमित नहीं है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार से आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। इसी विश्वास के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों, यहां तक कि पश्चिमी बिहार और अन्य राज्यों से भी लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कराने यहां आते हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार जरूरी हो गया था।
ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत हो रहा विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल इस परियोजना के अंतर्गत घाट पर दो मंजिला इमारत, 38 नए अंतिम संस्कार प्लेटफॉर्म, प्रवेश द्वार, बेहतर संपर्क मार्ग, पंजीकरण कार्यालय, आगंतुक भवन, लकड़ी लाने के लिए रैंप, पेयजल व्यवस्था और आधुनिक शौचालय बनाए जाएंगे। इससे विशेष रूप से बाढ़ के मौसम में होने वाली असुविधाएं भी दूर होंगी।
पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी के अनुसार, विकास कार्य के दौरान घाट से जुड़े प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों को पूरी तरह बनाए रखा जाएगा।
इतिहास और आधुनिकता का संगम
स्थानीय लोगों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट का निर्माण 18वीं शताब्दी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने कराया था और बाद में उन्होंने ही इसका पुनर्निर्माण भी करवाया। वर्षों तक यहां किसी बड़े सुधार कार्य की कमी रही, जबकि जनसंख्या और भीड़ लगातार बढ़ती रही। अब कई दशकों बाद इस ऐतिहासिक मोक्ष स्थल के पुनर्विकास से न केवल व्यवस्थाएं सुधरेंगी, बल्कि घाट की सांस्कृतिक और धार्मिक गरिमा भी और अधिक निखरेगी।