Kashi Vishwanath Temple : 2025 में आस्था की राजधानी बनी काशी, नए साल को लेकर भी किए गए भव्य तैयारी

Edited By Updated: 28 Dec, 2025 03:32 PM

kashi vishwanath temple

जिसे दुनिया की सबसे पुरानी जीवंत नगरी माना जाता है, वर्ष 2025 के समापन और नए साल के स्वागत के दौरान भक्ति के एक नए चरम पर है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

Kashi Vishwanath Temple : जिसे दुनिया की सबसे पुरानी जीवंत नगरी माना जाता है, वर्ष 2025 के समापन और नए साल के स्वागत के दौरान भक्ति के एक नए चरम पर है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। महाकुंभ के प्रभाव और विकसित कॉरिडोर की सुलभता के कारण इस वर्ष करोड़ों भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई है।

श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड तोड़ आगमन
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 काशी के लिए ऐतिहासिक रहा है। केवल महाकुंभ के 45 दिनों के दौरान ही 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में यह संख्या और भी तेजी से बढ़ी है। शनिवार को दोपहर तक ही 2 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके थे और नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 10 लाख के पार जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

नए साल पर विशेष इंतजाम

स्पर्श दर्शन पर रोक
24 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को छूने (स्पर्श दर्शन) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्रद्धालु केवल दूर से ही 'झांकी दर्शन' कर सकेंगे।

VIP और प्रोटोकॉल दर्शन निलंबित
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भीड़ के दौरान कोई भी वीआईपी पास या विशेष प्रोटोकॉल मान्य नहीं होगा। मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र के अनुसार, इस समय हर श्रद्धालु वीवीआईपी है और सभी को एक ही कतार में लगकर दर्शन करने होंगे।

बैरिकेडिंग और सुरक्षा
मंदिर परिसर से लेकर दशाश्वमेध घाट तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जल पुलिस और NDRF की टीमें गंगा घाटों पर तैनात हैं ताकि स्नान के दौरान कोई अनहोनी न हो।

सुगम मार्ग
श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार और गलियां निर्धारित की गई हैं, ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

आस्था और आधुनिकता का संगम
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से यहां पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पिछले चार वर्षों में लगभग 26 करोड़ लोग इस धाम में आ चुके हैं। प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु धैर्य बनाए रखें और मंदिर द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें ताकि उनकी तीर्थयात्रा सुखद और सुरक्षित रहे।

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