Edited By Prachi Sharma,Updated: 07 Jan, 2026 10:57 AM

Magh Mela 2026 : संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले में इन दिनों आस्था और भक्ति के कई अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां देशभर से आए साधु-संत अपनी कठिन तपस्या से श्रद्धालुओं को अचंभित कर रहे हैं। इन्हीं के बीच श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े...
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Magh Mela 2026 : संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले में इन दिनों आस्था और भक्ति के कई अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां देशभर से आए साधु-संत अपनी कठिन तपस्या से श्रद्धालुओं को अचंभित कर रहे हैं। इन्हीं के बीच श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के नागा संन्यासी पुजारी बाबा शंकरपुरी इन दिनों विशेष चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
एक पैर पर 7 साल की कठिन साधना
सीतापुर के नैमिषारण्य से आए 26 वर्षीय बाबा शंकरपुरी 'खड़ेश्वरी' साधना कर रहे हैं। उनकी तपस्या की सबसे खास बात यह है कि वे पिछले 7 वर्षों से लगातार एक पैर पर खड़े हैं। मेले में आने वाले लोग उनकी इस जिजीविषा और संकल्प को देख दंग रह जाते हैं।
साधना का स्वरूप और दिनचर्या
झूले का सहारा: उन्होंने अपनी कुटिया में एक झूला लगा रखा है, जिसका सहारा लेकर वे खड़े रहते हैं।
आशीर्वाद की मुद्रा: वे वहीं खड़े होकर भक्तों को दर्शन देते हैं और मोर पंख से उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
संकल्प: बाबा का कहना है कि उनकी यह कठिन तपस्या जनकल्याण और परोपकार की भावना से प्रेरित है।
संन्यास का सफर
बाबा शंकरपुरी ने महज 7 साल की उम्र में सांसारिक जीवन त्याग दिया था। साल 2013 के प्रयागराज कुंभ के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े में दीक्षा लेकर नागा संन्यासी के रूप में अपना जीवन शुरू किया। वे अपने गुरु, हरदोई के श्री दिगंबर तोतापुरी जी महाराज के मार्गदर्शन में अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखे हुए हैं।
विशेष आकर्षण: माघ मेले में आने वाले श्रद्धालु बाबा की इस कठिन तपस्या को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लोग उनके साथ तस्वीरें और सेल्फी भी लेते हैं, जिसे बाबा सहज भाव से स्वीकार कर उन्हें अपना आशीर्वाद देते हैं।