Kedarnath Dham : बाबा केदार की परंपरा में बदलाव, रूप छड़ी अब उत्तराखंड से बाहर नहीं जाएगी

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 11:12 AM

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Kedarnath Dham : भगवान Kedarnath Dham की पवित्र रूप छड़ी को राज्य से बाहर ले जाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद Badrinath-Kedarnath Temple Committee की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में तय किया गया कि अब केदारनाथ की ऐतिहासिक रूप छड़ी को...

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Kedarnath Dham : भगवान Kedarnath Dham की पवित्र रूप छड़ी को राज्य से बाहर ले जाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद Badrinath-Kedarnath Temple Committee की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में तय किया गया कि अब केदारनाथ की ऐतिहासिक रूप छड़ी को देवभूमि उत्तराखंड से बाहर नहीं ले जाया जाएगा।

बैठक में इस विषय को लेकर समिति के कई सदस्यों ने नाराज़गी भी जताई। उनका कहना था कि रूप छड़ी को राज्य के बाहर ले जाने की कोई परंपरा नहीं रही है और ऐसा करना मंदिर की परंपराओं के विपरीत माना जा रहा है।

इसी बीच उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री Satpal Maharaj ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि मीडिया में 13 फरवरी से लगातार यह खबरें सामने आ रही हैं कि केदारनाथ धाम के रावल ने महाराष्ट्र के Nanded में एक कार्यक्रम के दौरान नए रावल की घोषणा की और इस कार्यक्रम में मंदिर की ऐतिहासिक रूप छड़ी व अन्य पवित्र सामग्रियां भी भेजी गईं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये गतिविधियां मंदिर की स्थापित परंपराओं और नियमों के अनुरूप नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों का केदारनाथ धाम के विकास और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान रहता है। ऐसे समय में जब धाम के कपाट खुलने वाले हैं, इस तरह की खबरों से देशभर में गलत संदेश जा सकता है।

मंत्री ने मंदिर समिति से जल्द से जल्द पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परंपराओं से जुड़े इस गंभीर विषय पर सक्षम स्तर से तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि समिति की बैठक में सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि रूप छड़ी को बाहर ले जाने की परंपरा पहले कभी नहीं रही। इसी वजह से सदस्यों में नाराज़गी थी और सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में रूप छड़ी देवभूमि से बाहर नहीं जाएगी। मंत्री का पत्र मिलने के बाद समिति आगे की कार्रवाई कर रही है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2000 में भी रूप छड़ी को उत्तराखंड से बाहर ले जाने का मुद्दा उठ चुका था। उस समय मंदिर समिति के खजांची ने एक पत्र के माध्यम से कार्याधिकारी को जानकारी दी थी कि रावल ने दक्षिण भारत ले जाने के लिए मंदिर के खजाने से कुछ वस्तुओं की सूची दी थी। हालांकि उस समय भी यह स्पष्ट किया गया था कि परंपरा के अनुसार मंदिर के खजाने से ऐसी पवित्र वस्तुएं कभी बाहर नहीं दी जातीं।

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