Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Feb, 2026 12:44 PM

खाटूश्यामजी का वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला (2026) इस समय अपने पूरे शबाब पर है। सीकर की यह पावन नगरी 'हाथों में निशान और लबों पर श्याम' के नाम के साथ एक मिनी इंडिया जैसी नजर आ रही है।
Khatu Shyam Ji Mela 2026 : खाटूश्यामजी का वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला (2026) इस समय अपने पूरे शबाब पर है। सीकर की यह पावन नगरी हाथों में निशान और लबों पर श्याम' के नाम के साथ एक मिनी इंडिया जैसी नजर आ रही है। प्रशासन और भक्तों के बीच तालमेल ने इस बार के उत्सव को और भी खास बना दिया है।
आस्था का सैलाब: 4 दिन में 7 लाख श्रद्धालु
मेले के शुरुआती 4 दिनों में ही करीब 7 लाख भक्तों ने बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाई है। 21 फरवरी से शुरू हुए इस मेले में भीड़ का आलम यह है कि रींगस से खाटू धाम तक का पूरा मार्ग भक्तों की कतारों से पट गया है। प्रशासन ने इस बार 75 फीट मार्ग पर अत्याधुनिक गणना कैमरे लगाए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या का सटीक डेटा प्राप्त हो रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि 28 फरवरी तक चलने वाले इस 8 दिवसीय मेले में कुल 30 से 35 लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे।
विदेशी फूलों और 11 हजार डमरू से सजा दरबार
इस साल बाबा का दरबार किसी अलौकिक दुनिया जैसा नजर आ रहा है। बाबा श्याम के मंदिर को चीन, न्यूजीलैंड और नीदरलैंड से मंगाए गए खास फूलों से महकाया गया है। मंदिर परिसर में 11,000 डमरुओं की गूँज भक्तों में एक अलग ही ऊर्जा भर रही है। मंदिर के सिंह द्वार को जगन्नाथपुरी और 12 ज्योतिर्लिंग की भव्य थीम पर सजाया गया है।
VIP कल्चर पर ब्रेक और कड़े सुरक्षा इंतजाम
मेले की सबसे बड़ी खबर यह है कि इस बार VIP दर्शन पूरी तरह बंद हैं। चाहे नेता हो या अभिनेता, सबको आम भक्त की तरह ही लाइन में लगना पड़ रहा है। मेले की निगरानी के लिए 5,000 से अधिक पुलिसकर्मी और 1,000 निजी गार्ड तैनात हैं। पूरे मेला क्षेत्र को 22 सेक्टर में बांटा गया है, जहां ड्रोन और CCTV कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 14 कतारों की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त मात्र 1 घंटे के भीतर दर्शन कर पा रहे हैं।
सबसे बड़ा दिन: 27 फरवरी (आमलकी एकादशी)
मेले का मुख्य आकर्षण 27 फरवरी को होगा, जब 'आमलकी एकादशी' के अवसर पर सबसे बड़ा जनसैलाब उमड़ेगा। इस दिन के लिए प्रशासन ने खास तैयारी की है। अंतिम तीन दिनों में बाबा के पट 24 घंटे खुले रहेंगे ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रहे। पैदल यात्रियों के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप और सहायता बूथ बनाए गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही 40 किमी पैदल चलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें। तोरण द्वार से मंदिर की दूरी और व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू हैं।
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