Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Jan, 2026 01:50 PM

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि वे बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 के पावन पर्व पर संगम में पवित्र स्नान नहीं करेंगे। उनका यह फैसला मौनी अमावस्या के दिन हुई उस घटना के विरोध में है, जहां पुलिस ने उनके रथ और पालकी को रोक दिया था।
Swami Avimukteshwaranand Magh Mela Controversy : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि वे बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 के पावन पर्व पर संगम में पवित्र स्नान नहीं करेंगे। उनका यह फैसला मौनी अमावस्या के दिन हुई उस घटना के विरोध में है, जहां पुलिस ने उनके रथ और पालकी को रोक दिया था। स्वामी जी का कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उन्हें सुरक्षा और सम्मान का लिखित आश्वासन नहीं देते, वे स्नान के लिए नहीं जाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या पर प्रशासन ने न केवल उन्हें रोका, बल्कि उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी भी की। प्रशासन द्वारा उनके 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर सवाल उठाने और सुविधाओं को वापस लेने के नोटिस पर भी उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई है।
बाबा रामदेव की प्रतिक्रिया: साधु को नहीं करना चाहिए विवाद
संगम नगरी पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने इस पूरे विवाद पर सधा हुआ लेकिन कड़ा बयान दिया है। रामदेव ने कहा कि कुंभ और माघ मेला अध्यात्म का समागम है, यहां आने वाले हर व्यक्ति, चाहे वह साधु हो या सामान्य भक्त, उसे अपना अहंकार बाहर छोड़कर आना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि एक संन्यासी की भाषा हमेशा मर्यादित होनी चाहिए। साधु बनने के बाद अभिमान करना शोभा नहीं देता। उन्होंने अपील की कि संतों को आपसी विवादों से बचकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।
प्रशासन की सफाई
मेला प्रशासन का कहना है कि स्वामी जी को स्नान से नहीं रोका गया था, बल्कि मौनी अमावस्या की भारी भीड़ के कारण उन्हें वाहन ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। सुरक्षा नियमों के पालन के लिए उनसे पैदल जाने का अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।
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