Edited By Sarita Thapa,Updated: 08 Jan, 2026 03:47 PM
मकर संक्रांति 2026 इस बार केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सौभाग्य और समृद्धि का एक विशाल द्वार खोलने वाला दिन साबित होगा। इस वर्ष सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश बेहद खास है, क्योंकि दशकों बाद ग्रहों का ऐसा अनूठा तालमेल बन रहा है जो 6 दुर्लभ और...
Makar Sankranti 2026 Shubh Sanyog : मकर संक्रांति 2026 इस बार केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सौभाग्य और समृद्धि का एक विशाल द्वार खोलने वाला दिन साबित होगा। इस वर्ष सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश बेहद खास है, क्योंकि दशकों बाद ग्रहों का ऐसा अनूठा तालमेल बन रहा है जो 6 दुर्लभ और शक्तिशाली शुभ संयोगों को जन्म दे रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर साल संक्रांति पर सूर्य देव एक विशिष्ट वाहन पर सवार होकर आते हैं, जिसका सीधा असर आने वाले पूरे साल की सुख-शांति, अर्थव्यवस्था और राजनीति पर पड़ता है। इस बार सूर्य का वाहन क्या होगा और वे 6 चमत्कारी योग कौन से हैं जो आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकते हैं।
साल 2026 में कब है मकर संक्रांति?
ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और देवताओं का दिन शुरू हो जाएगा। शुभ मुहूर्त में किया गया स्नान और दान इस बार कई गुना अधिक फल देने वाला होगा।
कौन से हैं वो 6 शुभ संयोग'?
वृद्धि योग (कार्यों में सफलता)
इस साल संक्रांति पर 'वृद्धि योग' का शुभ प्रभाव रहेगा। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किए गए पुण्य कार्य जैसे- स्नान, दान और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। यह समय नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी अत्यंत फलदायी है।
ध्रुव योग (स्थिरता और शांति)
रात के समय 'ध्रुव योग' का निर्माण होगा। ज्योतिष में इसे एक स्थिर और सकारात्मक योग माना जाता है, जो कार्यों में मजबूती और मानसिक शांति प्रदान करता है।
ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव
पर्व के दौरान पूरे समय ज्येष्ठा नक्षत्र विद्यमान रहेगा। इंद्र देव और बुध ग्रह के स्वामित्व वाला यह नक्षत्र शक्ति, तीक्ष्ण बुद्धि और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। इस नक्षत्र में सूर्य की उपासना बौद्धिक विकास के लिए उत्तम है।
षट्तिला एकादशी का पारण
इस वर्ष संक्रांति पर विशेष संयोग यह है कि इसी दिन षट्तिला एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु सूर्योदय के बाद स्नान-दान कर अपना व्रत खोलेंगे, जिससे उन्हें एकादशी और संक्रांति दोनों का संयुक्त पुण्य प्राप्त होगा।

गुरुवार का खास दिन
14 जनवरी 2026 को गुरुवार का दिन पड़ रहा है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की एक साथ आराधना करने का यह दुर्लभ मौका है। बृहस्पति देव की कृपा से इस दिन की शुभता और अधिक बढ़ गई है।
तिल व भीष्म द्वादशी का संगम
संक्रांति के साथ माघ मास की द्वादशी तिथि का मेल हो रहा है, जिसे तिल द्वादशी या भीष्म द्वादशी कहा जाता है। पितरों की शांति के लिए तर्पण करने और तिल का दान करने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। इससे पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।
किस वाहन पर सवार होकर आएंगे सूर्य देव?
मकर संक्रांति पर सूर्य देव के आगमन का स्वरूप उनके 'वाहन' से तय होता है, जिसका असर देश और दुनिया की आर्थिक व राजनीतिक स्थिति पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 2026 में सूर्य देव का वाहन सिंह होने की संभावना है। उनका उप-वाहन गज हो सकता है। जब सूर्य सिंह वाहन पर सवार होते हैं, तो यह शासन-सत्ता में मजबूती और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, यह बाजार में उतार-चढ़ाव और अनाज की कीमतों में वृद्धि का संकेत भी देता है।
संक्रांति का फल और महत्व
इस बार संक्रांति का आगमन 'मंदा' अवस्था में हो रहा है, जिसका अर्थ है कि न्याय व्यवस्था कड़ी होगी और धर्म के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ेगा। 6 शुभ संयोगों के कारण इस दिन काले तिल, गुड़, घी, ऊनी कपड़े और खिचड़ी का दान करना दरिद्रता को दूर करने वाला और मोक्ष का मार्ग खोलने वाला माना जा रहा है।

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