Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज पर नहीं देखा जाता पंचांग, अबूझ मुहूर्त में करें विवाह और मांगलिक कार्य

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 10:03 AM

phulera dooj 2026

Phulera Dooj 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन माह को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसी माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक...

Phulera Dooj 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन माह को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसी माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि यह दिन इतना शुभ होता है कि विवाह सहित किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

 Phulera Dooj

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में फुलेरा दूज की तिथि इस प्रकार है:
द्वितीया तिथि प्रारंभ:
18 फरवरी 2026, शाम 4:57 बजे
द्वितीया तिथि समाप्त: 19 फरवरी 2026, दोपहर 3:58 बजे
उदयातिथि के अनुसार पर्व: 19 फरवरी 2026 (गुरुवार)

 Phulera Dooj
क्यों नहीं देखा जाता इस दिन विवाह का मुहूर्त?
हिंदू परंपरा में विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। हालांकि, फुलेरा दूज को ‘अबूझ मुहूर्त’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन बिना पंचांग देखे भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

 Phulera Dooj

इसके पीछे प्रमुख कारण:
श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री कृष्ण ने फूलों के साथ होली खेलने की परंपरा की शुरुआत की थी। उनके दिव्य आशीर्वाद से यह दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है।

विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन
यदि किसी जोड़े की कुंडली में ग्रहों का पूर्ण मेल न हो या लंबे समय तक विवाह के लिए उपयुक्त तिथि न मिल रही हो, तो फुलेरा दूज के दिन विवाह करना शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए विवाह में दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।

ब्रज में दिखती है अनोखी छटा
फुलेरा दूज का विशेष उत्साह ब्रज क्षेत्र, मथुरा और वृंदावन में देखने को मिलता है।

फूलों से भव्य श्रृंगार
मंदिरों में श्री कृष्ण और राधा रानी का आकर्षक फूलों से श्रृंगार किया जाता है।

फूलों की होली
इस दिन रंगों के स्थान पर फूलों की पंखुड़ियों से होली खेली जाती है, जिसे ‘फूलों वाली होली’ कहा जाता है। भक्त एक-दूसरे पर फूल बरसाकर प्रेम और आनंद का उत्सव मनाते हैं।

विशेष भोग
मंदिरों और घरों में मालपुआ, खीर और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है।

फुलेरा दूज का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
फुलेरा दूज को सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। प्रकृति में नई ऊर्जा और रंगों का संचार होने लगता है। यह पर्व प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता का संदेश देता है।

 Phulera Dooj

इस दिन क्या करें?
नया व्यवसाय शुरू करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। गृह प्रवेश, सगाई या अन्य मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। जरूरतमंदों को फूल या मिठाई का दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

फुलेरा दूज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, आस्था और उल्लास का उत्सव है। ‘अबूझ मुहूर्त’ होने के कारण यह दिन विवाह सहित हर शुभ कार्य के लिए विशेष माना जाता है। वर्ष 2026 में 19 फरवरी को मनाया जाने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ अवसर लेकर आएगा।

 Phulera Dooj

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!