Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Feb, 2026 03:18 PM

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल फाल्गुन मास का अंतिम दिन होता है, बल्कि इसी पावन तिथि पर रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होलिका दहन के साथ होती है।
Falgun Purnima 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल फाल्गुन मास का अंतिम दिन होता है, बल्कि इसी पावन तिथि पर रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होलिका दहन के साथ होती है। शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य अनुसार दान करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मान्तर के दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। तो आइए जानते हैं फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त और सही तिथि के बारे में-
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 तिथि
पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से होगा, जिसका समापन अगले दिन 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 07 मिनट पर होगा।
स्नान-दान का समय
धार्मिक कार्यों, पवित्र स्नान और दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम समय 3 मार्च की सुबह 5 बजकर 05 मिनट से 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
दिन का चौघड़िया मुहूर्त (3 मार्च)
चर (सामान्य): सुबह 09:56 से 11:24 तक
लाभ (उन्नति): सुबह 11:24 से दोपहर 12:52 तक
अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 12:52 से 02:20 तक
होलिका दहन का विशेष मुहूर्त
होलिका दहन के लिए शुभ समय शाम को 6:22 बजे से लेकर रात 8:50 बजे तक रहेगा।
भद्रा काल की स्थिति
दहन से पूर्व भद्रा का प्रभाव इस प्रकार रहेगा:
भद्रा पूंछ: रात 01:25 से 02:35 तक (3 मार्च की सुबह)
भद्रा मुख: सुबह 02:35 से 04:30 तक (3 मार्च की सुबह)

फाल्गुन पूर्णिमा पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।
स्नान के बाद हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
भगवान सत्यनारायण या विष्णु जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित करें।
इस दिन माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।
सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल, अनाज, वस्त्र और गुड़ का दान करें।
शाम को चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें जल (अर्घ्य) दें। इससे मानसिक शांति और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।

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