Masik Shivratri Vrat Katha : मासिक शिवरात्रि की यह चमत्कारी कथा बदल सकती है आपकी किस्मत, मिलेगा योग्य जीवनसाथी

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 01:45 PM

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Masik Shivratri Vrat Katha : पंचांग के अनुसार 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ कथा पढ़ना भी बेहद शुभ माना जाता है। इसे पढ़ें बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है।

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Masik Shivratri Vrat Katha : पंचांग के अनुसार 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ कथा पढ़ना भी बेहद शुभ माना जाता है। इसे पढ़ें बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है। 

Masik Shivratri vrat ki Katha मासिक शिवरात्रि व्रत कथा  

मासिक शिवरात्रि के महत्व को बताने वाली कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें दो कथाएं विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं एक शिकारी चित्रभानु की और दूसरी एक ब्राह्मण दंपति की। इन दोनों कथाओं में यह संदेश मिलता है कि सच्चे भाव से की गई भक्ति, चाहे वह अनजाने में ही क्यों न हो और जरूरतमंदों की सेवा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

Masik Shivratri Vrat Katha

चित्रभानु शिकारी की कथा

कथा के अनुसार, प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था जो जंगल में जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उस पर एक साहूकार का काफी कर्ज भी था। एक बार शिवरात्रि के दिन साहूकार ने कर्ज न चुका पाने के कारण उसे अपने पास बंदी बना लिया। वहीं चित्रभानु ने लोगों को शिवरात्रि की पूजा और कथा करते हुए सुना।

अगले दिन उसे छोड़ दिया गया, जिसके बाद वह शिकार की तलाश में जंगल गया, लेकिन पूरे दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला। रात होने पर वह एक बेल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। रात भर जब वह अपने धनुष को संभालता रहा, तो पेड़ से बेलपत्र टूटकर नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। उसी दौरान कई हिरण उसके सामने आए, लेकिन उसने उन्हें नहीं मारा। इस तरह अनजाने में ही उससे शिवरात्रि का व्रत और शिव पूजा पूरी हो गई। इस पुण्य के प्रभाव से उसका मन बदल गया और उसका हृदय करुणा से भर गया। उसने हिंसा का मार्ग छोड़ दिया और भगवान शिव की भक्ति में लग गया।

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ब्राह्मण दंपति की कथा
एक अन्य कथा में बताया जाता है कि एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी हर महीने श्रद्धा के साथ मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते थे। एक बार उन्होंने पूरी निष्ठा से यह व्रत किया और भगवान शिव से आशीर्वाद की कामना की। व्रत पूर्ण करने के बाद उन्होंने राह चलते कुछ लोगों को दान-दक्षिणा दी। उसी दिन उनके घर एक निर्धन ब्राह्मण आया। दंपति ने उसे सम्मानपूर्वक भोजन कराया और उसकी सहायता की। उनकी इस सेवा भावना और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके जीवन की सभी इच्छाएं पूर्ण कर दीं।

इन कथाओं से यह सीख मिलती है कि श्रद्धा, दया और सेवा भाव के साथ किया गया व्रत और पूजा निश्चित रूप से भगवान शिव की कृपा दिलाती है।

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