Edited By Niyati Bhandari,Updated: 05 Jan, 2026 11:36 AM

Mauni Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में मौनी अमावस्या को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है। माघ मास में आने वाली यह अमावस्या स्नान-दान, मौन व्रत और मोक्ष साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसी कारण हर वर्ष माघ मेले और कुंभ जैसे आयोजनों...
Mauni Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में मौनी अमावस्या को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है। माघ मास में आने वाली यह अमावस्या स्नान-दान, मौन व्रत और मोक्ष साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसी कारण हर वर्ष माघ मेले और कुंभ जैसे आयोजनों में इस दिन श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।

मौनी अमावस्या कब है 2026? (Mauni Amavasya 2026 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि इस प्रकार है:
मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026, रविवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 18 जनवरी 2026, रात 12:03 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 19 जनवरी 2026, रात 01:21 बजे
यह अमावस्या माघ कृष्ण पक्ष में आती है इसलिए इसे माघी अमावस्या या माघ अमावस्या भी कहा जाता है।
मौनी अमावस्या का धार्मिक और पौराणिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं त्रिवेणी संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) में स्नान करने आते हैं, इसलिए इस दिन का स्नान दिव्य स्नान कहलाता है।
माघ मास में सूर्य देव मकर राशि में स्थित रहते हैं और मौनी अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का विशेष संयोग बनता है, जो मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

माघ स्नान का सबसे बड़ा दिन क्यों मानी जाती है मौनी अमावस्या?
मौनी अमावस्या को माघ स्नान का सबसे बड़ा दिन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन मौन व्रत का विशेष महत्व है। संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है। आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर मिलता है। यह दिन पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इस दिन मौन धारण कर संगम स्नान करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के दोष समाप्त हो जाते हैं।
मौनी अमावस्या पर दान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है। विशेष रूप से तिल, कंबल, अन्न और वस्त्र, गौदान। इन दानों से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृ दोष शांत होते हैं।
मौनी अमावस्या 2026 न केवल माघ मेले की सबसे महत्वपूर्ण तिथि है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और मोक्ष साधना का महापर्व भी है। इस दिन संगम स्नान, मौन व्रत और दान करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
