Edited By Niyati Bhandari,Updated: 05 Nov, 2026 08:10 AM

मेघालय की मावसमाई गुफा में मिले महज 11 सैंटीमीटर लंबे पत्थर ने पूर्वोत्तर भारत में पिछले करीब 6,000 वर्षों के मानसून का इतिहास सामने लाने में मदद की है। वैज्ञानिकों ने इस नमूने के अध्ययन से पता लगाया है कि
शिलांग (एजैंसी): मेघालय की मावसमाई गुफा में मिले महज 11 सैंटीमीटर लंबे पत्थर ने पूर्वोत्तर भारत में पिछले करीब 6,000 वर्षों के मानसून का इतिहास सामने लाने में मदद की है। वैज्ञानिकों ने इस नमूने के अध्ययन से पता लगाया है कि हजारों साल पहले मानसून की ताकत में किस तरह बदलाव आया और इस पर दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाले जलवायु परिवर्तनों का क्या असर पड़ा।
यह शोध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) खड़गपुर की याचना वर्मा और अनिल के. गुप्ता तथा भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आई.आई.एस.ई.आर.), कोलकाता के प्रशांत सान्याल के नेतृत्व में किया गया। इसके निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदों में मौजूद खनिज हजारों वर्षों तक जमा होते रहते हैं। इससे बनने वाली पत्थर की संरचनाओं को स्टैलेग्माइट कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने इसी संरचना की खनिज विशेषताओं और ऑक्सीजन आइसोटोप का विश्लेषण किया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन प्राचीन जलवायु और मानसून में बदलाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।