Edited By Niyati Bhandari,Updated: 09 Jan, 2026 09:22 AM

जहर और अमृत
अमृत बाजार में नहीं मिलता, यह संतों की वाणी में मिलता है। देह मृत है, संतों की वाणी अमृत है। आपको पता होना चाहिए कि जब समुद्र मंथन हुआ तो उससे जहर और अमृत दोनों निकले। अमृत तो देवों ने पी
जहर और अमृत
अमृत बाजार में नहीं मिलता, यह संतों की वाणी में मिलता है। देह मृत है, संतों की वाणी अमृत है। आपको पता होना चाहिए कि जब समुद्र मंथन हुआ तो उससे जहर और अमृत दोनों निकले। अमृत तो देवों ने पी लिया पर जहर पीने को कोई राजी नहीं हुआ। अंतत: वह शिव जी को पीना पड़ा। कथा संकेत करती है कि जिन्होंने अमृत पिया वे देव और जिन्होंने हंसते-हंसते जहर पी लिया वे महादेव हुए। मुखाग्नि किसे कहते हैं? जो मुर्दे की चिता को दी जाती है, वह नहीं बल्कि वह है जब कोई बीड़ी-सिगरेट पीता है और उसके मुख से जो अग्नि होती है वही मुखाग्नि है।

जीते-जी मुखाग्नि
मतलब साफ है बीड़ी-सिगरेट पीने वाला अपने को जीते जी मुखाग्नि दे रहा है। देश के युवाओं के कंधों पर स्वर्णिम भारत के निर्माण की जिम्मेदारी है। अत: वे ध्यान दें कि भारत का निर्माण धुएं के छल्ले उड़ाने से नहीं, अपितु कठोर परिश्रम से हो सकता है।

दिमाग ठंडा रखो
व्यक्ति घर बनाता है। सुंदर बनाने के लिए उसमें फर्नीचर लगाता है। फिर उसे ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशनर लगाता है। घर एयर कंडीशंड बना लिया, अच्छी बात है। ऑफिस, एयर कंडीशंड बना लिया, अच्छी बात है। गाड़ी एयर कंडीशंड बना ली, अच्छी बात है। अब मेरा भी एक कहा मानो। अपने दिमाग को भी एयर कंडीशंड बना लो तो सच में ‘ठंडा-ठंडा कूल-कूल’ हो जाएगा। मकान ठंडा और दिमाग में आग लग रही हो तो बाहर का एयर कंडीशनर क्या करेगा। घर को ठंडा रखना जितना जरूरी है, उससे भी ज्यादा जरूरी है दिमाग को ठंडा रखना।

मौन : जीवन की शक्ति
आज बोलने वालों का जमाना है। हर कोई बोलना चाहता है। सुनने को यहां कोई राजी नहीं है। सभी सुनाने को आतुर हैं पर ज्यादा बोलना बहस, विवाद, तनाव और झगड़े को निमंत्रण देना है। बोलना अच्छा है, पर ज्यादा बोलना अच्छा नहीं। खाना अच्छा है, पर ज्यादा खाना अच्छा नहीं। वाणी का संयम है मौन। मौन जीवन की शक्ति है, अपने आप में वरदान है। मौन में जो शक्ति है, वह शब्दों में नहीं। जब सामने वाला दो-तीन बार कहने से भी न माने तो चुप हो जाना चाहिए।
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