Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Oct, 2026 12:38 PM

सनातन धर्म में एकदाशी तिथि का बहुत खास महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत के लिए समर्पित होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है।
Papankusha Ekadashi 2026 : सनातन धर्म में एकदाशी तिथि का बहुत खास महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत के लिए समर्पित होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। पापांकुशा एकादशी का नाम भी अपने आप में विशेष अर्थ रखता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को पाप कर्मों से दूर रहने और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा मिलती है। तो आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व, भगवान विष्णु के किस स्वरूप की पूजा की जाती है।
भगवान विष्णु के किस स्वरूप की होती है पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। पद्मनाभ भगवान विष्णु का वह स्वरूप है, जिनकी नाभि से कमल प्रकट होता है और उस कमल पर भगवान ब्रह्मा विराजमान माने जाते हैं। यह स्वरूप सृष्टि की उत्पत्ति और पालन से जुड़ा हुआ है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के चरणों में पुष्प, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करके सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से श्रीहरि का स्मरण करने और धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन में सकारात्मकता आती है।
पापांकुशा एकादशी का क्या है धार्मिक महत्व?
सनातन परंपरा में पापांकुशा एकादशी को पुण्यदायी तिथियों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान, जप और भगवान विष्णु की आराधना करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह एकादशी व्यक्ति को अपने आचरण पर विचार करने, गलतियों से सीखने और अच्छे कर्म करने का संदेश भी देती है। इस पावन अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और धार्मिक ग्रंथों का श्रवण करना भी लाभकारी माना जाता है।
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